होर्मुज टेंशन का असर: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी उतार-चढ़ाव, ब्रेंट क्रूड 6% उछला
NTN NEWS REPORT// मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी की खबरों के बीच ग्लोबल मार्केट में घबराहट का माहौल बन गया। ईरान की ओर से पलटवार के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला, जहां ब्रेंट क्रूड करीब 6% तक महंगा हो गया।

तेल कीमतों में इस उछाल और युद्ध की आशंकाओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार ने गिरावट के साथ शुरुआत की, लेकिन दिनभर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
गिरावट के साथ शुरुआत, फिर तेज रिकवरी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 78,493 अंकों के मुकाबले गिरकर 78,203 पर खुला। शुरुआती दबाव के बाद बाजार में अचानक खरीदारी लौटी और सेंसेक्स उछलकर 78,733 के स्तर तक पहुंच गया।
हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स फिर फिसलकर 140 अंकों से ज्यादा नीचे आ गया।
निफ्टी की भी सेंसेक्स जैसी चाल
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी उतार-चढ़ाव भरे कारोबार का गवाह बना। पिछले बंद 23,353 की तुलना में निफ्टी गिरावट के साथ खुला। हालांकि शुरुआती कमजोरी के बाद इसमें भी रिकवरी आई और यह 24,420 के स्तर तक पहुंच गया।
लेकिन वैश्विक तनाव के दबाव में निफ्टी भी हरे निशान से फिसलकर फिर लाल निशान में आ गया।
गिफ्ट निफ्टी में दबाव, फिर दिग्गजों ने संभाला बाजार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज पर तनातनी के चलते गिफ्ट निफ्टी में शुरुआती कारोबार के दौरान बड़ी गिरावट देखी गई थी। इससे संकेत मिल रहे थे कि घरेलू बाजार में भी भारी दबाव रहेगा।
हालांकि, बाजार खुलने के बाद कुछ दिग्गज शेयरों में खरीदारी ने इंडेक्स को सहारा दिया और बाजार ने रिकवरी दिखाई।
इन शेयरों में दिखी तेजी
लार्जकैप कैटेगरी में:
- SBI Share – 2.10% उछाल
- ICICI Bank Share – 2% चढ़ा
- Trent Share – 1.10% की बढ़त
मिडकैप शेयरों में:
- BHEL Share – 3% उछाल
- AU Bank Share – 1.50% चढ़ा
- Voltas Share – 1.40% मजबूत
स्मॉलकैप में:
- CUB Share – 3% की बढ़त
- Radico Khetan Share – 2.50% चढ़ा
निवेशकों में सतर्कता का माहौल
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा मार्ग है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव या बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है। तेल कीमतों में तेजी से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव बनता है।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक ग्लोबल हालात पर पैनी नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा बाजार की चाल तय करेगी।