
CGMSC घोटाला: पूरक चालान पेश, 550 करोड़ की आर्थिक क्षति का आरोप, फर्जी दस्तावेज, आपसी सांठगांठ और तीन गुना तक महंगी सप्लाई का खुलासा
NTN NEWS REPORT// रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एसीबी/ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरक चालान न्यायालय में पेश कर दिया है। ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत धारा 409, 120बी भा.दं.वि. तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1) एवं 13(2) के तहत यह चालान 16 अप्रैल 2026 को अदालत में प्रस्तुत किया गया।
इस पूरक चालान में चार आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है, जिनमें अभिषेक कोशल (डायरेक्टर, रिकर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि., पंचकुला), राकेश जैन (प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर), प्रिंस जैन (लायजनर, रिकर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा. लि.) और कुंजल शर्मा (मार्केटिंग हेड, डायसिस इंडिया प्रा. लि., नवी मुंबई) शामिल हैं।
‘हमर लैब’ योजना में टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
राज्य सरकार की ‘हमर लैब’ योजना के तहत जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल उपकरण और रिएजेंट की खरीदी की गई थी। जांच में सामने आया कि निविदा प्रक्रिया में कथित रूप से फुल टेंडरिंग के जरिए मोहित कॉर्पोरेशन को लाभ पहुंचाया गया।
विवेचना के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ कि प्रिंस जैन, शशांक चौपड़ा का सगा जीजा है और वह रिकर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स के लिए लायजनिंग का कार्य करता था। वहीं, रिकर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने भविष्य में CGMSC से अपनी सप्लाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मोहित कॉर्पोरेशन के साथ समन्वय किया।
फर्जी दस्तावेजों से पात्रता साबित करने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, तीनों फर्मों ने अपनी पात्रता साबित करने के लिए टेंडर शर्तों के अनुरूप वास्तविक क्षमता से अलग उत्पादन क्षमता, सर्विस, मेंटेनेंस और इंस्टॉलेशन से संबंधित फर्जी दस्तावेज तैयार कर निविदा में प्रस्तुत किए। इन दस्तावेजों के समन्वय में प्रिंस जैन की भूमिका बताई गई है।
इतना ही नहीं, निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से तीनों फर्मों के बीच आपसी समन्वय और कथित कार्टेलाइजेशन किया गया। टेंडर में यही तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुईं और वित्तीय दरें खोली गईं।
समान पैटर्न में भरे गए टेंडर, दरों में भी ‘मैचिंग’
जांच में पाया गया कि तीनों फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक-साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण समान पैटर्न में भरा गया। जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था, उन्हें भी तीनों ने एक जैसे दर्शाया।
दरें भी एक जैसे पैटर्न में कोट की गईं। सबसे कम दर मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा, उसके बाद आरएमएस और श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई, जिससे प्रतिस्पर्धा का आभास तो बना, लेकिन वास्तविकता में कथित रूप से आपसी समझौता था।
तीन गुना तक अधिक कीमत पर सप्लाई, 550 करोड़ की क्षति
विवेचना में यह भी सामने आया कि मेडिकल उपकरणों के रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स के लिए डायसिस कंपनी ने एक निश्चित एमआरपी तय की थी। आरोप है कि कुंजल शर्मा ने मोहित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चौपड़ा के साथ मिलकर डायसिस की ओर से CGMSC को वास्तविक एमआरपी से अधिक दर भेजी।
परिणामस्वरूप CGMSC ने मोहित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा CGMSC को वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
अब तक 10 आरोपियों के खिलाफ चालान
प्रकरण में अब तक कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। ‘हमर लैब’ योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
CGMSC घोटाले में पूरक चालान पेश होने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।