
जांजगीर-नैला नगर पालिका में सब ठीक नहीं? सत्ता भाजपा की, लेकिन प्रशासनिक मनमानी और अंदरूनी असंतोष चरम पर!
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-नैला नगर पालिका इन दिनों गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों के घेरे में है। चौंकाने वाली स्थिति यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सत्ता होने के बावजूद भाजपा के ही पार्षद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली से नाराज नजर आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पार्षदों ने अपनी ही नगर पालिका सरकार के फैसलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी तक दे दी है।

मामला वार्ड क्रमांक 21, 22, 24 और 25 में स्थित सामुदायिक भवनों को बिना पार्षदों की जानकारी और सहमति के किराए पर चढ़ाए जाने से जुड़ा है। पार्षदों का आरोप है कि यह फैसला न तो पीआईसी में चर्चा के लिए लाया गया और न ही संबंधित जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी गई।
जरूरतमंदों के हक पर डाका?
पार्षदों का कहना है कि सामुदायिक भवन आम जनता, सामाजिक आयोजनों और जरूरतमंद वर्ग के लिए बनाए गए हैं। ऐसे भवनों को निजी उपयोग के लिए किराए पर देना जनहित के खिलाफ है और यह सीधे तौर पर जरूरतमंदों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
सूत्रों का बड़ा दावा: अध्यक्ष पति की बढ़ती दखलंदाजी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर पालिका में अध्यक्ष के पति द्वारा अनावश्यक रूप से नगर पालिका के प्रशासनिक कार्यों में दखल दिया जा रहा है। आरोप है कि कई महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका सामने आ रही है, जिससे न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि अध्यक्ष गिरी स्वयं किए जाने जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।

यही कारण बताया जा रहा है कि भाजपा पार्षदों के बीच अंदरखाने गहरा असंतोष पनप रहा है। पार्षदों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर लिए जा रहे फैसले पार्टी और संगठन दोनों के लिए नुकसानदेह हैं।
कम समय में ही अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप
नगर पालिका के कम समय के कार्यकाल में ही अनियमितता और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों का सामने आना कहीं न कहीं भाजपा के घोषित सिद्धांतों पर सवाल खड़े कर रहा है।
जबकि भाजपा को एक अनुशासित पार्टी के रूप में जाना जाता है, ऐसे में जांजगीर-नैला नगर पालिका में उभरती तस्वीर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली मानी जा रही है।
असंतोष बढ़ा, अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी चर्चा
नगर पालिका नैला-जांजगीर में जिस तरह से अध्यक्ष के पति की कथित दखलंदाजी बढ़ रही है, वह निसंदेह एक बड़े राजनीतिक असंतोष को जन्म दे रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सीएमओ को सौंपा गया ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
भाजपा पार्षदों ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए—
- लिए गए निर्णयों को निरस्त करने
- पारदर्शिता सुनिश्चित करने
- भविष्य में पार्षदों को विश्वास में लेकर निर्णय लेने
की मांग की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने रुख नहीं बदला, तो वे जनहित में सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
क्या नगर पालिका प्रशासन और पार्टी संगठन समय रहते हालात संभाल पाएंगे, या फिर यह मामला भाजपा के लिए एक बड़े आंतरिक संकट का रूप ले लेगा?
नगर की जनता और राजनीतिक गलियारों की नजरें अब आने वाले कदमों पर टिकी हैं।