गर्लफ्रेंड और उसके पिता की हत्या के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका पर सुनवाई से भी इनकार
मेरठ डबल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, आरोपी को बताया 'गर्लफ्रेंड किलर'
NTN REPORT// नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मेरठ में शादी से ठीक पहले युवती और उसके पिता की हत्या के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सागर को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने से भी मना कर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की ओर से की गई कड़ी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बन गईं।

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया और उसके आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा- गर्लफ्रेंड, पिता और भाई पर हमला, बेहद गंभीर मामला
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपनी कथित प्रेमिका की हत्या कर दी, उसके पिता को भी मौत के घाट उतार दिया और उसके भाई को गोली मारकर घायल कर दिया।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हे भगवान! तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया, उसके पिता की भी हत्या कर दी और उसका भाई भी घायल हो गया। तुम तो बहुत बड़े दुस्साहसी निकले। क्या तुमने अजय देवगन वाली बिहार पर बनी फिल्म नहीं देखी? तुम तो गर्लफ्रेंड किलर हो। यह किसी फिल्म की कहानी जैसा मामला है।”
क्या है पूरा मामला?
यह सनसनीखेज घटना जून 2020 की है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतक युवती के भाई ने मेरठ में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सागर युवती से एकतरफा प्रेम करता था और लंबे समय से उसका पीछा (स्टॉकिंग) कर रहा था।
पुलिस जांच के मुताबिक युवती की शादी किसी अन्य युवक से तय हो गई थी। शादी से महज दो दिन पहले सागर अपने कुछ साथियों के साथ युवती के घर पहुंचा और वहां अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
इस हमले में युवती और उसके पिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने सागर को गिरफ्तार कर लिया था और तब से वह जेल में बंद है।
बचाव पक्ष ने रखी ये दलीलें
सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक राणा ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि घटना के समय सागर की उम्र केवल 18 वर्ष थी और वह पिछले छह वर्षों से जेल में निरुद्ध है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन का पूरा मामला ऐसी एफआईआर पर आधारित है जिसमें कई तथ्य सही नहीं हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता और मृतका के भाई ने ट्रायल कोर्ट में जिरह के दौरान स्वीकार किया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि एफआईआर उसी ने दर्ज कराई थी।
वकील ने यह भी कहा कि कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हो पाया है तथा राज्य सरकार को अभी भी 43 गवाहों के बयान दर्ज कराने हैं। बचाव पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता के बयान में आए बदलाव से एफआईआर की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट नहीं हुआ संतुष्ट
हालांकि अदालत बचाव पक्ष की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
जब अदालत ने याचिका खारिज करने के संकेत दिए तो आरोपी के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने उन्हें भविष्य में उचित समय पर पुनः संबंधित अदालत का रुख करने की छूट देते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहले कर चुका है जमानत याचिका खारिज
गौरतलब है कि इससे पहले भी सागर की जमानत याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। हालांकि इस हमले में शामिल बताए गए कुछ अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
मामले पर बनी हुई है देशभर की नजर
मेरठ का यह दोहरे हत्याकांड का मामला लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। शादी से ठीक पहले युवती और उसके पिता की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद आरोपी की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मामले का ट्रायल अभी जारी है और शेष गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।