
राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों का कब्जा, हाइकोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद नहीं सुधर रही व्यवस्था
राष्ट्रीय राजमार्ग में बैठे मवेशियों से हो रही कई दुर्घटनाएं
छत्तीसगढ़ 19 अक्टूबर 24// जिले की मुख्य सड़कों हाइवे में आम रास्तों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कभी भी दुर्घटनाएं घट सकती हैं? और घट भी रही है। यातायात काफी खतरनाक हो गया है।
जांजगीर जिले के अकलतरा हाइवे चौक से लेकर जांजगीर मुख्यालय तक हाइवे और मुख्य मार्ग पर मवेशियों का जमावड़ा यातायात के लिए एक बड़ी समस्या बन गई।
दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी इस मार्ग के विभिन्न गांव एवं शहरी क्षेत्र में सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है जिसके कारण यातायात काफी खतरनाक हो गया है। शहर से गुजरने वाले हाइवे, मुख्य सड़कों ,आम रास्तों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कभी भी दुर्घटनाएं घट सकती हैं।
मुख्य सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है परंतु जिम्मेदारों द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और मवेशियों का जमावड़ा हटने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारी हो कि लोग अपने अपने घरों में पशु धन के रूप में मवेशियों का पालन करते आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्यों में से है यहां लोगों के द्वारा घरेलू मवेशियों को पशुधन के रूप में पूजा की जाती है।
प्रतिवर्ष दिवाली के मौके पर पशुधन की पूजा अर्चना के लिए गोवर्धन पूजा उत्सव का आयोजन मनाया जाता है। हर मौजा में चरागाह हुआ करता था। जहां मवेशी बरसात के दिनों में विचरण करते थे। अन्य दिनों में भी यहां मवेशियों का जमावड़ा रहता था। कालांतर में लोग अपने घरों में मवेशियों के पालने को झमेला समझने लगे और धीरे-धीरे गांव में मवेशियों की संख्या घटने लगी। किसान जहां पहले बैल एवं भैंसा से हल जोतते थे तथा कृषि कार्य में भी इनका उपयोग किया जाता था। परंतु अब इस ट्रैक्टर के युग में बड़े-बड़े किसान भी बैल या भैंसा रखना छोड़ ट्रैक्टर से खेती करने लगे हैं।
जिले भर में आवारा पशुओं के साथ हो रही दुर्घटनाओं को लेकर सड़कों में विरोध करने वाले को शायद दिखाई नहीं दे रहा है कि बीच सड़क पर बैठ कर आवारा पशु स्वयं दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं।
जब घटना घट जाती है तब लोग जागते हैं। लोगों का कहना है कि सामाजिक संगठनों को इस विषय पर काम करना चाहिए कि पशु मालिक अपने जानवरो को आवारा न छोड़े, वहीं जानवर रखने का स्थान न हो तो गौ-शाला में भेज दें, लेकिन इस विषय पर काम नहीं करते बल्कि जानवरों के साथ होने वाली दुर्घटना का इंतजार करते हैं और सड़कों पर अपने नाम के लिये विरोध दर्ज करते हैं जबकि लोगों को मूल विषय पर काम करना चाहिए जिससे वह काफी दूर हैं।
रात में वाहन चालकों को होती है समस्या
बीच सड़क पर बैठे आवारा पशुओं के साथ होने वाली दुर्घटना के संबंध में लोगों से चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा रात के समय वाहन चालकों को समस्या होती है। कुछ आवारा पशु ऐसे हैं जिनका रंग काला होता है और बीच सड़क पर झुम्मड़ लगाकर बैठे रहते हैं। तेज गति से आवागमन वाले वाहन चालकों को ये जानवर दिखाई नहीं देते जिसके कारण दुर्घटना घट जाती है।
आवारा पशुओं का झुम्मड़ क्षेत्रों में दिखाई देता हैं, वहीं बीच सड़क पर इक्ठ्ठे बैठ जाते हैं जिसके कारण वाहनो के आवागमन में परेशानियां होती हैं। इन जानवरों को इसी तरह आवारा छोड़कर रखा गया तो एक दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है। लोगों का कहना है कि हाइवे की सड़क हो ,शहर हो, या ग्रामीण क्षेत्र सभी मुख्य मार्गों में आवारा पशु बीच सड़क पर बैठ कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
पूर्व में खराब सड़कें और मवेशियों के जमावड़े पर माननीय हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा भी था कि समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है।
प्रदेश की खराब सड़कों और मवेशियों के जमावड़े के लिए माननीय हाईकोर्ट ने राज्य शासन, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और जिम्मेदारों की विफलता पर सवाल उठाए थे। माननीय हाइकोर्ट ने कहा था कि दिखाने के लिए पेट्रोलिंग और मवेशी हटाने की कार्रवाई न करे, बल्कि समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है। हाईकोर्ट ने पूछा था कि मवेशियों को गौठान या चारागाह में भेजने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है?
नेशनल हाइवे की खराब सड़कों पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि एनएचएआई पर सड़क सुधार का जिम्मा है। सड़कों पर मवेशी विचरण पर नगर निगम/पालिका और शासन को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सिर्फ दिखाने के रेडियम बेल्ट लगाने और मवेशी पकड़ने की कार्रवाई की जा रही है। मवेशियों को प्रदेश में बने चारागाह और गौठान भेजना चाहिए। पर ऐसा कुछ नहीं हो रहा।
बता दें कि मवेशियों के जमावड़े से हादसों पर जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि मुख्य मार्गों और शहर की आम सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ दिया जाता है। इनकी वजह से भी दुर्घटनाएं हो रही हैं। नेशनल हाइवे पर सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है, जहां अंधेरे में सड़कों पर बैठे जानवरों के कारण बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें लोग घायल हो रहे और मौत भी हुई है।