
पुलिस के ड्यूटी के दौरान शराब सेवन करने पर अंकुश लगाने से सुधरेगी छवि
Police : प्रायः देखने व सुनने को मिलता है कि पुलिस वाला शराब के नशे में धुत्त होकर ड्यूटी कर रहा है या सड़क के किनारे पड़ा हुआ है। लोग बातें तब करते हैं कि जब वह वर्दी पहने हुए होता है लोगों का बातें करना कोसना जायज भी है क्योंकि लोग उसे उस रूप में स्वीकार नहीं कर पाते हैं क्योंकि पुलिस एक ऐसा अद्भुत संगठन है जिनके कंधों पर हर एक नागरिक राज्य व राष्ट्र की जिम्मेदारी होती है और उनसे ऐसे किसी भी कृत्य की उम्मीद नहीं होती जिससे कानून व्यवस्था संभालने वाले स्वयं ही इनके लिए जिम्मेदार बन जाएं।
अभी हाल ही में शराब का सेवन कर कर्त्तव्यरत कुछ पुलिस कर्मियों के कारण पुलिस महकमें की फजीहत हुई है। वहीं इसका अच्छा संदेश समाज में नहीं जाता है और इसके कारण कई प्रकार के प्रश्न चिन्ह खड़े होते रहे हैं। वैसे तो सामाजिक सरोकार से जुड़े कई प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विभाग द्वारा लगातार चलाये जाते हैं जिससे हर नागरिक अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो।
तो क्यों न कुछ ऐसे ठोस प्रयास की ओर बढ़ा जाए जिससे कुछ हद तक कर्तव्य के दौरान शराब या मादक पदार्थ का सेवन कर रहे पुलिस पर अंकुश लगाया जा सके।
इस पर निजात के लिए नियमित रूप से मासिक अथवा पाक्षिक औचक निरीक्षण कर ब्रीथ एनालाइजर से जाँच कर विभिन्न स्तर के पुलिस अधिकारी/कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान शराब सेवन करने की प्रवृत्ति से हतोत्साहित किये जा सकने के प्रयास से कुछ निजात संभव है।जिससे समाज मे प्रदेश में एक अच्छी छवि पुलिस की उभर कर सामने आए और ईमानदारी से समाज व राष्ट्र की सेवा करने वाले पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि हो।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में समाज को नशा मुक्त करने के लिए पुलिस के द्वारा कई प्रकार के अभियान और कार्यवाहियां की जा रही है और उसका सुखद परिणाम भी नजर आ रहा है उसी तरह से संपूर्ण पुलिस महकमे में भी ऐसे ऑपरेशन कार्यवाही की दरकरार है कि कोई भी पुलिस का अधिकारी/कर्मचारी कर्तव्य के दौरान नशे में ना रहे यथासंभव किसी भी वक्त नशे में चूर ना रहे पूरा पुलिस महकमा ऐसा आदर्श प्रस्तुत करे कि लोग पुलिस से प्रेरणा लेवे ना कि तिरस्कार करें। नशा मुक्त पुलिस की छवि निश्चित तौर पर सुधरेगी और “परित्राणाय साधुनाम ” को चरितार्थ कर सकेगी।