जांजगीर के सरकारी विश्रामगृहों की सुरक्षा पर उठे सवाल? अब लगेगा सीसीटीवी! प्रोटोकॉल अधिकारी ने आज ही पत्र जारी करने की कही बात
कथित निजी आयोजन और शराबखोरी की चर्चाओं के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल; एसडीएम सुब्रत प्रधान बोले—आज ही पीडब्ल्यूडी को पत्र जारी कर सीसीटीवी लगाने की पहल करेंगे
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। जिले में शासकीय भवनों, निर्माण कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब शासकीय विश्रामगृहों में कथित निजी आयोजन, शराब सेवन और अनधिकृत आवाजाही से जुड़ी चर्चाओं ने सरकारी परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि किसी विश्रामगृह में क्या हुआ, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे संवेदनशील सरकारी परिसरों की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाए हुए हैं?

इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए जिला मुख्यालय के प्रोटोकॉल अधिकारी एवं अनुभागीय अधिकारी राजस्व सुब्रत प्रधान से चर्चा की गई। उन्होंने सीसीटीवी कैमरे लगाने के सुझाव को सुरक्षा की दृष्टि से उचित बताते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र जारी कर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा जाएगा। उनके अनुसार, सुरक्षा के सवाल को गंभीरता से लेते हुए आज ही पत्र जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
आरोप-प्रत्यारोप से बचने और पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी जरूरी: सुब्रत प्रधान
प्रोटोकॉल अधिकारी सुब्रत प्रधान ने कहा कि आए दिन आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं। ऐसी परिस्थितियों से बचने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का बेहतर तरीका यह है कि संबंधित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, जिससे यह पता चल सके कि कौन आ रहा है और कौन जा रहा है।
उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेकर आज ही पत्र जारी किया जाएगा और सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके।
यह आश्वासन ऐसे समय में सामने आया है, जब शासकीय विश्रामगृहों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि पत्र जारी होने के बाद सीसीटीवी लगाने की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और सुरक्षा व्यवस्था को धरातल पर कितना मजबूत किया जाता है।
पीडब्ल्यूडी एसडीओ बोले—प्रावधान होगा तो सीसीटीवी जरूर लगाएंगे
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सूर्यवंशी से भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यदि सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान होगा, तो विभाग की ओर से इन्हें जरूर लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में प्रशासन के प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा व्यवस्था देखी जाती है। यदि मामला सुरक्षा से जुड़ा है, तो सीसीटीवी लगाने का सुझाव अच्छा है और इस संबंध में होने वाली कार्रवाई के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
दोनों अधिकारियों के वक्तव्यों से यह स्पष्ट है कि सीसीटीवी लगाने के सुझाव पर सकारात्मक रुख सामने आया है। हालांकि, कैमरे लगाने की वास्तविक स्थिति, स्वीकृति, बजट और कार्य पूरा होने की समयसीमा की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
ऑडिटोरियम और खेल स्टेडियम के मामलों के बीच फिर उठे जवाबदेही के सवाल
जिले में ऑडिटोरियम और खेल स्टेडियम से जुड़े विषयों को लेकर पूर्व में भी सवाल उठते रहे हैं। तत्कालीन कलेक्टर आकाश छिकारा के कार्यकाल के दौरान खेल स्टेडियम से संबंधित मामला भी सार्वजनिक चर्चा में रहा। अब शासकीय विश्रामगृहों की सुरक्षा का मुद्दा सामने आने के बाद प्रशासनिक निगरानी, सरकारी संपत्तियों के उपयोग और अधिकारियों की जवाबदेही पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
हालांकि, अलग-अलग मामलों की परिस्थितियां और तथ्य अलग हो सकते हैं। इसलिए प्रत्येक मामले में दस्तावेजों, जांच और आधिकारिक पक्ष के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
आखिर सरकारी विश्रामगृहों में निगरानी की व्यवस्था कैसी है?
शासकीय विश्रामगृह और सर्किट हाउस ऐसे परिसर हैं, जहां जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रोटोकॉल से जुड़े व्यक्तियों और अन्य अधिकृत आगंतुकों का आवागमन होता है। ऐसे स्थानों पर प्रवेश-निकास का रिकॉर्ड, अधिकृत अनुमति, परिसर के उपयोग का विवरण और सुरक्षा व्यवस्था का व्यवस्थित होना आवश्यक है।
यदि किसी विश्रामगृह में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इसके पीछे क्या कारण हैं। क्या कैमरे लगाने की कोई तकनीकी या सुरक्षा संबंधी बाध्यता है? क्या इस संबंध में कोई सरकारी दिशा-निर्देश लागू हैं? यदि कोई प्रतिबंध या विशेष प्रोटोकॉल है, तो प्रशासन को उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
वहीं, यदि ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है और सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे लगाए जा सकते हैं, तो संबंधित विभागों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर व्यवस्था लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
कथित शराबखोरी और अनधिकृत गतिविधियों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी
शासकीय विश्रामगृह में कथित निजी आयोजन, शराब सेवन और अनधिकृत आवाजाही से जुड़ी चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन यदि शिकायतें सामने आई हैं, तो उनकी अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए।
प्रशासन को संबंधित विश्रामगृह के उपयोग संबंधी अभिलेख, आगंतुक पंजी, अनुमति देने की प्रक्रिया और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
सीसीटीवी कैमरे इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रवेश द्वार, पार्किंग और सामान्य आवागमन वाले क्षेत्रों में उचित स्थानों पर कैमरे लगाए जाने से घटनाओं की जांच और अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कैमरों की व्यवस्था लागू नियमों और निजता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
सुरक्षा के नाम पर केवल आश्वासन नहीं, धरातल पर कार्रवाई जरूरी
प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा तत्काल पत्र जारी करने का आश्वासन सकारात्मक पहल है। लेकिन अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पत्र कब जारी होगा, पीडब्ल्यूडी द्वारा क्या कार्रवाई की जाएगी, सीसीटीवी लगाने के लिए आवश्यक स्वीकृति और बजट की व्यवस्था कब होगी तथा कैमरे कब तक स्थापित किए जाएंगे।
प्रशासन को जिले के सभी शासकीय विश्रामगृहों और सर्किट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। जहां आवश्यक हो, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी निगरानी, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा रखरखाव की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की जाए। साथ ही, आगंतुकों के पंजीयन और परिसर के उपयोग के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
संदेश स्पष्ट है—सरकारी परिसर किसी की निजी मनमानी के लिए नहीं, बल्कि निर्धारित शासकीय उद्देश्यों के लिए हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी पहचान और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था होनी चाहिए। पारदर्शी निगरानी से न केवल अनधिकृत गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि जिम्मेदारी से काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगने वाले निराधार आरोपों की स्थिति में भी वास्तविक तथ्य सामने लाए जा सकेंगे।
अब जिले की जनता की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। प्रोटोकॉल अधिकारी के आश्वासन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीसीटीवी कैमरे लगाने की पहल कितनी जल्दी वास्तविकता में बदलती है। क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था की असली कसौटी आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई है।