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बिहान योजना से बदली धनेश्वरी धीवर की जिंदगी, पैरा आर्ट से बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

नाबार्ड के सहयोग से सीखा हुनर, घर बैठे कलाकृतियां बनाकर कर रहीं अच्छी आमदनी; अन्य महिलाओं को भी दे रहीं प्रशिक्षण

NTN REPORT// जांजगीर-चांपा, 15 अक्टूबर 2026। हुनर, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अवरीद निवासी धनेश्वरी धीवर इसकी प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने पैरा आर्ट के हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाया है। नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने इस कला में दक्षता हासिल की और आज घर बैठे कलाकृतियां तैयार कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। इतना ही नहीं, वे अन्य लोगों को भी पैरा आर्ट का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

नाबार्ड के सहयोग से मिला प्रशिक्षण, हुनर को मिली नई पहचान

धनेश्वरी धीवर की पैरा आर्ट के प्रति रुचि को सही दिशा देने में प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने नाबार्ड के सहयोग से पैरा आर्ट का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए कौशल को उन्होंने निरंतर अभ्यास और मेहनत से निखारा तथा धीरे-धीरे इस कला में दक्षता हासिल की।

प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अपने हुनर पर विश्वास के साथ उन्होंने पैरा आर्ट को स्वरोजगार के रूप में अपनाया। इसके बाद उन्होंने अपनी कलात्मक क्षमता को आमदनी के साधन में बदलने की दिशा में प्रयास शुरू किए। आज वे स्वयं पैरा आर्ट की कलाकृतियां तैयार कर रही हैं और इस काम के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में जुटी हैं।

घर बैठे काम कर कमा रहीं आमदनी

पैरा आर्ट को स्वरोजगार से जोड़कर धनेश्वरी धीवर ने यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध हुनर भी रोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है। घर से ही कलाकृतियां तैयार करने की सुविधा ने उन्हें अपने कौशल का उपयोग करते हुए आमदनी अर्जित करने का अवसर दिया है।

धनेश्वरी धीवर के लिए यह पहल केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि अपने हुनर को पहचान दिलाने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का माध्यम भी बनी है। उनके प्रयासों से यह संदेश मिलता है कि उचित प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और मेहनत के बल पर महिलाएं अपने कौशल को आजीविका से जोड़ सकती हैं।

खुद बनीं कुशल प्रशिक्षक, दूसरों को भी सिखा रहीं कला

अपनी कला में दक्षता हासिल करने के बाद धनेश्वरी धीवर अब अन्य लोगों को भी पैरा आर्ट का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे अपने अनुभव और सीखे हुए कौशल को साझा कर दूसरों को इस कला से परिचित करा रही हैं, ताकि वे भी इसे सीखकर स्वरोजगार के अवसर तलाश सकें।

उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं और अन्य इच्छुक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। एक ओर वे स्वयं अपनी आजीविका को मजबूत बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर अपने प्रशिक्षण के माध्यम से दूसरों को भी हुनरमंद बनने का अवसर दे रही हैं। इस तरह पैरा आर्ट उनके लिए व्यक्तिगत आत्मनिर्भरता के साथ-साथ कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ा माध्यम बन रहा है।

बिहान योजना से ग्रामीण महिलाओं को मिल रही नई दिशा

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। धनेश्वरी धीवर की सफलता की कहानी इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों की उपयोगिता को सामने लाती है।

उनकी यात्रा बताती है कि ग्रामीण महिलाओं में हुनर और आगे बढ़ने की क्षमता की कमी नहीं है। जरूरत है उन्हें उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराने की। जब इन प्रयासों के साथ मेहनत और लगन जुड़ती है, तो पारंपरिक या रचनात्मक कौशल भी स्वरोजगार का आधार बन सकता है।

आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने का संदेश

धनेश्वरी धीवर ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाली इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। पैरा आर्ट के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहीं धनेश्वरी की कहानी अन्य महिलाओं को भी अपने हुनर को पहचानने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और आजीविका के नए अवसर तलाशने की प्रेरणा देती है।

धनेश्वरी धीवर की यह पहल संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत से ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को रोजगार में बदलकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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