
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में बड़ा एक्शन, अवैध पीजी पर MCD की कार्रवाई; छात्रों के हॉस्टल को लेकर NHRC सख्त!
NTN REPORT// नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026। सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध पीजी और भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में निगम की टीमें सक्रिय हैं। लक्ष्मी नगर में संचालित पीजी का संरचनात्मक सर्वे करने के लिए एमसीडी की टीम पहुंची है। वहीं, इसी बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों, विशेषकर दिल्ली से बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त और किफायती छात्रावास सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लिया है।

लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में अवैध पीजी की जांच
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और किराये की इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी के मद्देनजर एमसीडी ने लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में कार्रवाई शुरू की है।
लक्ष्मी नगर में चल रहे अवैध पीजी का संरचनात्मक सर्वे कराया जा रहा है। इस दौरान भवन की स्थिति और उसकी संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के सामने आवास की समस्या
दूसरी ओर, एनएचआरसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाओं की कमी को मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है।
मामला वर्ष 2025 में द नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन की शिकायत के बाद एनएचआरसी के सामने आया था। शिकायत में बताया गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब 72 हजार स्नातक छात्र हैं, जबकि उनके लिए उपलब्ध हॉस्टल सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
दिल्ली से बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को मजबूरी में महंगे पीजी या निजी किराये के मकानों में रहना पड़ता है। इससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और उनकी पढ़ाई तथा समग्र कल्याण भी प्रभावित हो सकता है।
30 सितंबर 2025 को हुई थी सुनवाई
इस मामले पर 30 सितंबर 2025 को प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी पीठ ने सुनवाई की थी। आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।
निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को अनुस्मारक भेजा गया और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।
इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट को आयोग ने रिकॉर्ड पर लिया।
विश्वविद्यालय ने बताई हॉस्टल और बुनियादी ढांचे की जरूरत
दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने जवाब में बताया कि उसके स्नातक कार्यक्रम 65 संबद्ध एवं घटक महाविद्यालयों के माध्यम से संचालित होते हैं। विश्वविद्यालय ने दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों के सामने रहने की समस्या का भी उल्लेख किया।
विश्वविद्यालय की ओर से हॉस्टल की नई सुविधाओं के साथ-साथ मौजूदा बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता बताई गई।
हालांकि, एनएचआरसी ने विश्वविद्यालय के जवाब को शिकायत के मूल मुद्दे का पर्याप्त समाधान नहीं माना।
आयोग के अनुसार, जवाब में मौजूदा हॉस्टल क्षमता, बुनियादी ढांचे की वास्तविक कमी, कितनी अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता है, नए हॉस्टल की जरूरत, वित्तीय जिम्मेदारियां और कार्य पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया था।
मुख्य सचिव और UGC चेयरमैन को देना होगा विस्तृत एक्शन प्लान
अब एनएचआरसी की प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के अध्यक्ष को दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ समन्वय कर हॉस्टल सुविधाओं के विस्तार को लेकर व्यापक और कार्रवाई आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि योजना केवल नए हॉस्टल बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें निम्न बिंदुओं का भी स्पष्ट आकलन किया जाना होगा—
- मौजूदा हॉस्टल क्षमता और बुनियादी ढांचे का आकलन।
- पुराने हॉस्टलों के नवीनीकरण और उन्नयन की संभावनाएं।
- मौजूदा हॉस्टल के विस्तार से क्षमता बढ़ाने की संभावना।
- नए या अतिरिक्त हॉस्टल की आवश्यकता और व्यवहार्यता।
- महाविद्यालयवार हॉस्टल जरूरतों का आकलन।
- हॉस्टल सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रस्तावित कदम।
- संस्थागत और वित्तीय जिम्मेदारियों का निर्धारण।
- योजना लागू करने की स्पष्ट समयसीमा।
15 अक्टूबर तक देनी होगी रिपोर्ट
एनएचआरसी ने दिल्ली के मुख्य सचिव और यूजीसी अध्यक्ष को दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ समन्वय कर चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट, समेकित और कार्रवाई आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है।
सिर्फ दाखिला नहीं, सुरक्षित और किफायती आवास भी जरूरी
एनएचआरसी की कार्रवाई का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच केवल विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने तक सीमित न रहे। बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती रहने की व्यवस्था भी उपलब्ध हो।
सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध पीजी और भवनों की सुरक्षा पर एमसीडी की कार्रवाई तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाओं पर एनएचआरसी की सख्ती ने दिल्ली में विद्यार्थियों के आवास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।