₹21 हजार तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए बोनस का नियम, जानिए कितनी मिलेगी रकम और कब तक होगा भुगतान!
NTN REPORT// नई दिल्ली। कर्मचारियों के बोनस को लेकर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी प्रावधानों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मौजूदा श्रम कानून के तहत ₹21,000 तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को बोनस का लाभ मिल सकता है। हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है। वहीं ₹21,000 से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी वैधानिक बोनस की इस पात्रता सीमा में नहीं आते।

श्रम मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, बोनस से संबंधित पुराने भुगतान बोनस अधिनियम, 1965 के प्रावधानों को वेतन संहिता, 2019 में समाहित किया गया है। मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में ₹21,000 प्रति माह की पात्रता सीमा और बोनस की गणना के लिए ₹7,000 प्रति माह अथवा संबंधित न्यूनतम मजदूरी, जो भी अधिक हो, की सीमा का उल्लेख किया गया है।
कौन कर्मचारी बोनस पाने का पात्र होगा?
बोनस पाने के लिए केवल ₹21,000 तक वेतन होना ही पर्याप्त नहीं है। कर्मचारी को संबंधित कानून में निर्धारित अन्य शर्तों को भी पूरा करना होगा।
प्रमुख रूप से कर्मचारी ने संबंधित लेखा वर्ष में कम से कम 30 दिन काम किया होना चाहिए। पात्रता पूरी होने पर कर्मचारी को वैधानिक बोनस का लाभ मिल सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ₹21,000 की सीमा कर्मचारी के बोनस के लिए पात्र होने से संबंधित सीमा है, जबकि बोनस की वास्तविक गणना के लिए अलग गणना सीमा निर्धारित है।
बोनस कितना मिलेगा?
कानून के तहत न्यूनतम बोनस 8.33 प्रतिशत है, जबकि अधिकतम बोनस 20 प्रतिशत तक हो सकता है। मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों में भी न्यूनतम 8.33 प्रतिशत और अधिकतम 20 प्रतिशत बोनस का उल्लेख है।
बोनस की गणना के लिए आधार राशि ₹7,000 प्रति माह या संबंधित रोजगार के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, इनमें से जो अधिक हो, वह होगी।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी कर्मचारी की मासिक वेतन राशि ₹15,000 है और उसके काम के लिए संबंधित राज्य में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी ₹10,000 है।
ऐसी स्थिति में बोनस की गणना ₹15,000 पर नहीं, बल्कि निर्धारित गणना सीमा के अनुसार की जाएगी। यदि लागू न्यूनतम मजदूरी ₹7,000 से अधिक है, तो ₹7,000 के बजाय लागू न्यूनतम मजदूरी को आधार बनाया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि गणना के लिए लागू राशि ₹12,000 है, तो न्यूनतम बोनस की गणना इस प्रकार होगी—
₹12,000 × 8.33 प्रतिशत × 12 = लगभग ₹11,995
अर्थात इस उदाहरण में सालाना न्यूनतम बोनस करीब ₹11,995 होगा।
8.33 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक बोनस
कानूनी प्रावधानों के अनुसार पात्र कर्मचारी को न्यूनतम 8.33 प्रतिशत बोनस मिलना निर्धारित है। परिस्थितियों और लागू प्रावधानों के अनुसार बोनस की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत तक हो सकती है।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि प्रत्येक कर्मचारी को अनिवार्य रूप से 20 प्रतिशत बोनस नहीं मिलेगा। 8.33 प्रतिशत न्यूनतम और 20 प्रतिशत अधिकतम सीमा है।
₹21 हजार से अधिक वेतन वालों का क्या होगा?
जिस कर्मचारी का मासिक वेतन ₹21,000 से अधिक है, वह इस वैधानिक बोनस की निर्धारित पात्रता सीमा से बाहर है।
इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी ऐसे कर्मचारियों को बोनस दे ही नहीं सकती। कंपनी अपनी नीति, रोजगार अनुबंध या अन्य लागू प्रावधानों के तहत अतिरिक्त बोनस या प्रोत्साहन राशि दे सकती है। लेकिन भुगतान बोनस कानून के तहत अनिवार्य बोनस की पात्रता ₹21,000 की सीमा से जुड़ी है।
बोनस का भुगतान कब तक करना होगा?
बोनस के भुगतान को लेकर भी समय-सीमा निर्धारित है। लेखा वर्ष समाप्त होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर पात्र कर्मचारी को बोनस का भुगतान किया जाना होता है।
भुगतान बोनस अधिनियम के तहत सामान्य तौर पर लेखा वर्ष समाप्त होने के आठ महीने के भीतर बोनस का भुगतान किया जाता था। श्रम मंत्रालय के अनुसार भुगतान बोनस अधिनियम, 1965 को वेतन संहिता, 2019 में समाहित किया गया है।
कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे महत्वपूर्ण?
कर्मचारियों को बोनस से जुड़े नियमों को समझते समय तीन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए—
पहली — ₹21,000 तक मासिक वेतन वाली पात्रता सीमा।
दूसरी — बोनस की गणना के लिए ₹7,000 या संबंधित न्यूनतम मजदूरी, जो भी अधिक हो, उसे आधार माना जाना।
तीसरी — न्यूनतम बोनस 8.33 प्रतिशत और अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा।
श्रम मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार ₹21,000 की पात्रता सीमा और ₹7,000 अथवा न्यूनतम मजदूरी में से अधिक राशि को गणना सीमा के रूप में वर्ष 2016 से लागू व्यवस्था में दर्ज किया गया है। इसलिए इसे पूरी तरह नया नियम बताने के बजाय मौजूदा बोनस प्रावधानों की स्पष्टता/प्रवर्तन से जुड़ी जानकारी के रूप में समझना अधिक सटीक है।
बोनस की वास्तविक राशि कर्मचारी के वेतन, लागू न्यूनतम मजदूरी, पात्रता, कार्य किए गए दिनों और संबंधित प्रतिष्ठान पर लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी कर्मचारी के मामले में अंतिम गणना संबंधित दस्तावेजों और लागू नियमों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।