NEET-UG पेपर लीक विवाद: स्मृति ईरानी ने सरकार का किया बचाव, बोलीं— ‘युवाओं और सरकार के बीच दूरी बढ़ने का दावा गलत’
NTN REPORT// NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक बहस के बीच पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को युवाओं और केंद्र सरकार के बीच बढ़ती दूरी के रूप में पेश करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

‘सरकार ने तेजी से उठाए ठोस कदम’
एक साक्षात्कार में स्मृति ईरानी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा एंटी-पेपर लीक कानून लागू किया, विशेषज्ञों की टास्क फोर्स का गठन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों से सीधे संवाद स्थापित किया। उनके अनुसार, ये सभी कदम इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार छात्रों की चिंताओं को लेकर संवेदनशील और गंभीर है।
‘Gen-Z और सरकार के बीच दूरी बढ़ने का दावा गलत’
जब उनसे पूछा गया कि क्या छात्र आंदोलन नई पीढ़ी और सरकार के बीच बढ़ते फासले का संकेत है, तो उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरानी ने कहा कि देश के लाखों युवा भारतीय सेना, पुलिस और अन्य सरकारी संस्थानों में सेवा देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में केवल उम्र के आधार पर पूरी युवा पीढ़ी को सरकार विरोधी बताना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है और उम्र को समाज में नए विभाजन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
प्रदर्शन का अधिकार, लेकिन हिंसा स्वीकार नहीं
प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर स्मृति ईरानी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, बहस करने और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी को भी हिंसा या अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलनों के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की स्थिति पर अपेक्षित चर्चा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में यह आशंका जताई गई थी कि कुछ आपराधिक तत्व छात्र आंदोलनों में शामिल होकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी रखा पक्ष
पूर्व शिक्षा मंत्री ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनका पद छोड़ना सरकार की संवेदनशीलता का संकेत था ताकि छात्र आंदोलन का लाभ उठाकर कोई असामाजिक या आपराधिक तत्व कानून-व्यवस्था को प्रभावित न कर सके।
गौरतलब है कि NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे। इसी दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठी थी।
‘पेपर लीक नई समस्या नहीं, वर्षों पुरानी चुनौती’
स्मृति ईरानी ने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाएं नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से देश के सामने चुनौती रही हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) तैयार करने से पहले देशव्यापी स्तर पर व्यापक परामर्श अभियान चलाया था, जिसमें 2.25 लाख से अधिक ग्राम शिक्षा समितियों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए गए थे।
उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा बनाए गए कड़े कानून, जांच समितियां और संस्थागत सुधार भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेंगे।
(नोट: इस समाचार में स्मृति ईरानी द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों और संबंधित घटनाक्रम का विवरण प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न पक्षों के दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों एवं आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही मानी जाएगी।)यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।