
2030 तक भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये घट सकता है, SBI रिपोर्ट में बड़ा दावा!
NTN REPORT// भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से बढ़ावा देने की नीति आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान गति से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का सिलसिला जारी रहा तो वर्ष 2030 तक भारत कच्चे तेल के आयात बिल में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की कमी कर सकता है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि ऊर्जा के मामले में अन्य देशों पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।

तेल आयात संकट के बाद EV पर बढ़ा सरकार का फोकस
हाल के वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान-अमेरिका संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उत्पन्न बाधाओं के कारण भारत को कच्चे तेल के आयात में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई मौकों पर अधिक कीमत पर तेल खरीदना पड़ा, जिससे आयात बिल में भारी बढ़ोतरी हुई।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने और ईवी उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम उठा रही है। उद्देश्य है कि भविष्य में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम हो और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बने।
2027 से 2030 के बीच 35 लाख पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं EV
SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार जारी रहने पर वर्ष 2027 से 2030 के बीच लगभग 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वर्ष 2030 तक घरेलू ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, तो भारत का कच्चे तेल का आयात बिल लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो सकता है।
हर महीने तेजी से बढ़ रहे हैं EV रजिस्ट्रेशन
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष मार्च से जून के बीच देश में हर महीने औसतन 2.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ।
इसके मुकाबले 2025 में यह औसत लगभग 1.30 लाख वाहन प्रति माह था। यानी एक वर्ष के भीतर हर महीने लगभग 1 लाख अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत होने लगे हैं, जो इस क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती
SBI ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की सफलता काफी हद तक मजबूत चार्जिंग नेटवर्क पर निर्भर करेगी।
देश में वर्तमान में 29,151 सार्वजनिक EV चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं, लेकिन राज्यों के बीच इनका वितरण असमान है। कुछ राज्यों में एक चार्जिंग स्टेशन पर 200 से अधिक वाहनों का दबाव है, जबकि कुछ राज्यों में यह संख्या 50 वाहनों तक सीमित है।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में देश के लगभग 35 प्रतिशत EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है। ऐसे में अन्य राज्यों में भी तेजी से चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना आवश्यक होगा।
तेल पर विदेशी निर्भरता होगी कम
रिपोर्ट का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की मौजूदा गति बनाए रखती हैं, तो आने वाले वर्षों में पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
इसका सीधा असर कच्चे तेल के आयात पर पड़ेगा और भारत की मध्य-पूर्व, अमेरिका तथा अन्य तेल उत्पादक देशों पर निर्भरता घटेगी। साथ ही भविष्य में पारंपरिक पेट्रोल-डीजल पंपों की आवश्यकता भी कम हो सकती है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग नेटवर्क एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा।
SBI की रिपोर्ट बताती है कि यदि इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदा विकास दर और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो वर्ष 2030 तक भारत न केवल कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक घटा सकता है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर सकता है। हालांकि, इसके लिए पूरे देश में समान रूप से चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार और ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।