भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा होगी और मजबूत: अमित शाह ने दिए जमीन सौदों, निर्माण कार्यों और वित्तीय गतिविधियों की जांच के निर्देश
NTN REPORT// भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा के सालबगान में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, तस्करी पर रोक और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे प्रशासनिक तंत्र को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

सीमा सुरक्षा के लिए बनेगा फुल-प्रूफ सिक्योरिटी ग्रिड
बैठक में गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि सीमा सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, राजस्व विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मिलकर काम करना होगा। जिला कलेक्टर (DM), पुलिस अधीक्षक (SP), पटवारी तथा ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को भी सुरक्षा व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा।
सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में एक “फुल-प्रूफ बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड” विकसित करेगी, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
लागू होगा “टोटल टेरिटोरियल डिफेंस” मॉडल
बैठक में “टोटल टेरिटोरियल डिफेंस” मॉडल लागू करने पर भी जोर दिया गया। इस मॉडल के तहत केवल सीमा पर बाड़ या फेंसिंग लगाना पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि पूरे सीमावर्ती क्षेत्र को सुरक्षा कवच के दायरे में लाया जाएगा।
इसके अंतर्गत सीमा से लगे गांवों के लोगों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। स्थानीय नागरिकों को विशेष प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की पहचान एवं रोकथाम संबंधी जानकारी दी जाएगी।
त्रिपुरा में पहली बार लागू होगा गृह मंत्रालय का नया CCTV मॉडल
तकनीकी निगरानी को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय का नया CCTV मॉडल सबसे पहले त्रिपुरा में लागू किया जाएगा। BSF द्वारा उपयोग किए जा रहे पुराने कैमरों को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा।
इन कैमरों को जिला प्रशासन के नियंत्रण तंत्र से भी जोड़ा जाएगा, जिससे सीमा क्षेत्र में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके।
हथियार और नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
गृह मंत्री ने सीमा पार से होने वाली हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों के खिलाफ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सीमा क्षेत्रों में जमीन खरीद-बिक्री और निर्माण कार्यों पर रहेगी विशेष नजर
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक सीमा से लगे इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, बड़े निर्माण कार्यों और वित्तीय लेनदेन की व्यापक निगरानी का रहा।
गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले पांच वर्षों के भूमि अभिलेखों की गहन जांच की जाए। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किन व्यक्तियों या संस्थाओं ने जमीन खरीदी, किस उद्देश्य से खरीदी और वहां किस प्रकार की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
सरकार का मानना है कि कई बार संदिग्ध तत्व सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन खरीदकर या बड़े निर्माण कार्यों के माध्यम से अवैध गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नकली नोट और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर भी होगी निगरानी
सीमा क्षेत्रों में नकली भारतीय मुद्रा (फेक करेंसी) के नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय और राज्य एजेंसियां मिलकर ऐसे मामलों की जांच करेंगी ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आर्थिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
सीमावर्ती क्षेत्रों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा का उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करेंगी।
त्रिपुरा के सालबगान में हुई इस समीक्षा बैठक के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को नए स्तर पर मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। जमीन सौदों की जांच, तकनीकी निगरानी का विस्तार, स्थानीय लोगों की भागीदारी और तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे कदम आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।