
आलू के रिकॉर्ड उत्पादन से भरे कोल्ड स्टोरेज, किसानों को बेहतर दाम दिलाने की तैयारी में नई सरकार
NTN REPORT// पश्चिम बंगाल में इस साल आलू उत्पादन ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 2025-26 सीजन में राज्य का कुल आलू उत्पादन 140 लाख टन के पार पहुंच गया है. बेहतर मौसम, खेती का बढ़ा रकबा और अनुकूल परिस्थितियों के चलते किसानों को इस बार बंपर पैदावार मिली है. उत्पादन बढ़ने का सीधा असर राज्य के कोल्ड स्टोरेज पर दिखाई दे रहा है, जहां भारी मात्रा में आलू का भंडारण किया गया है।
पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य पतित पावन डे के अनुसार, इस बार करीब 74 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 65 लाख टन था. उन्होंने बताया कि राज्य के 95 प्रतिशत से अधिक कोल्ड स्टोरेज लगभग पूरी तरह भर चुके हैं. खास बात यह रही कि इस बार व्यापारियों की तुलना में किसानों ने खुद बड़ी मात्रा में आलू स्टोर कराया है.
पिछले साल के नुकसान से सतर्क दिखे कारोबारी
पिछले सीजन में आलू की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली थी, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. बड़ी मात्रा में आलू कोल्ड स्टोरेज में ही फंसा रह गया था और किसानों को मजबूरी में कम कीमतों पर अपनी उपज बेचनी पड़ी थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल दूसरे राज्यों में सप्लाई कमजोर पड़ने और अंतरराज्यीय व्यापार पर लगी रोक के कारण पश्चिम बंगाल के बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा था. इसका फायदा उत्तर प्रदेश को मिला, जिसने ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे प्रमुख बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली.
अंतरराज्यीय बिक्री पर लगी रोक हटाई गई
राज्य में नई बीजेपी सरकार बनने के बाद अब आलू, प्याज, फल, सब्जियां और अन्य जरूरी कृषि उत्पादों की अंतरराज्यीय आवाजाही पर लगी पाबंदियां हटा दी गई हैं. सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित कीमत मिल सकेगी.
मंत्री दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस बार आलू का उत्पादन काफी अधिक हुआ है, जिसके कारण कीमतों में गिरावट आई है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ममता बनर्जी ने बंगाल से बाहर आलू बेचने पर रोक लगा दी थी, जिससे किसानों को नुकसान हुआ.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ निर्देश दिए हैं कि राज्य का आलू देशभर में बेचा जाएगा ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके. सरकार इस दिशा में लगातार बातचीत और रणनीति पर काम कर रही है.
किसानों को राहत मिलने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बार अंतरराज्यीय बिक्री सुचारु रूप से जारी रहती है और बाहरी बाजारों में मांग बनी रहती है, तो किसानों को पिछले साल की तुलना में बेहतर दाम मिल सकते हैं. हालांकि रिकॉर्ड उत्पादन के कारण कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना भी जताई जा रही है.
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।