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धर्म

आज से शुरू हुआ अधिकमास: भगवान विष्णु की भक्ति, दान और साधना का पवित्र महीना, 15 जून तक रहेंगे मांगलिक कार्य वर्जित!

NTN REPORT// आज 17 मई से अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत हो गई है, जो 15 जून तक चलेगा। वैदिक ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस विशेष मास में पूजा-पाठ, दान, जप, तप और सात्विक जीवन का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। वहीं विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए कार्यों की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं।

फाइल फोटो

सौर और चंद्र कैलेंडर के संतुलन के लिए जोड़ा जाता है अधिकमास

अधिकमास हर वर्ष नहीं आता। दरअसल हिंदू पंचांग चंद्र गणना पर आधारित होता है, जिसमें एक वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर कैलेंडर 365 दिनों का माना जाता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर पैदा हो जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।

इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाता है कि हिंदू त्योहार और ऋतु चक्र का तालमेल बना रहे और पर्व सही मौसम में ही मनाए जाएं।

क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास

धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने में सच्चे मन से की गई भक्ति, दान और तपस्या का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

यह महीना सांसारिक इच्छाओं से थोड़ा दूर होकर आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित माना जाता है। इसलिए इसे पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक पर्व भी कहा जाता है।

अधिकमास में क्या करें

भगवान विष्णु की पूजा करें

इस महीने भगवान विष्णु की आराधना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं। सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण और पाठ भी अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिखावे से अधिक सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा का महत्व होता है।

दान-पुण्य करें

अधिकमास में दान को विशेष फलदायी बताया गया है। अन्न दान, वस्त्र दान, दीप दान और जरूरतमंदों की सहायता को पुण्यकारी माना जाता है।

धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस महीने में किया गया निस्वार्थ दान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाता है।

मंत्र जाप और व्रत रखें

इस अवधि में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष लाभकारी माना जाता है। श्रद्धालु तुलसी की माला से 108 बार मंत्र जाप कर सकते हैं।

व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है तथा व्यक्ति का ध्यान आध्यात्मिक साधना की ओर केंद्रित होता है।

धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें

अधिकमास में भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत पुराण और रामायण जैसे पवित्र ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे व्यक्ति को जीवन की सही दिशा और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है।

अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए

मांगलिक कार्य वर्जित

अधिकमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य शुभ संस्कार नहीं किए जाते। इसे सांसारिक कार्यों की बजाय भक्ति और साधना का समय माना गया है।

बड़ी खरीदारी से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान नया घर, वाहन, जमीन, महंगे गहने या अन्य बड़ी खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता।

नई शुरुआत टालें

नया व्यवसाय शुरू करना, घर निर्माण आरंभ करना या किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत भी इस महीने में टालने की सलाह दी जाती है।

अधिकमास व्रत की विशेष दिनचर्या

जो लोग पूरे महीने अधिकमास व्रत रखते हैं, उन्हें सात्विक और संयमित जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है। व्रत के दौरान दिन में केवल एक समय भोजन करने का नियम बताया गया है।

इस दौरान प्याज, लहसुन, अनाज और मांसाहार से परहेज किया जाता है। फल, दूध, साबूदाना और व्रत में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है।

श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, पूजा और ध्यान से दिन की शुरुआत करते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत और एकाग्र करने के लिए किया जाता है।

अधिकमास की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार पहले इस अतिरिक्त महीने को “मलमास” कहा जाता था। उस समय इसे अशुभ माना जाता था और इसमें कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते थे। इससे यह महीना स्वयं को उपेक्षित और महत्वहीन महसूस करने लगा।

पद्म पुराण के अनुसार दुखी होकर यह महीना भगवान विष्णु के पास पहुंचा और अपनी पीड़ा सुनाई। भगवान विष्णु ने इसकी व्यथा सुनकर इसे अपना लिया और अपना “पुरुषोत्तम” नाम प्रदान किया। तभी से यह महीना पुरुषोत्तम मास कहलाने लगा।

भगवान विष्णु ने कहा कि जो भी भक्त इस महीने में निस्वार्थ भाव से पूजा-पाठ, दान और अच्छे कर्म करेगा, उसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा और उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाएगा।

इस प्रकार जो महीना पहले उपेक्षित माना जाता था, वही कालांतर में सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीनों में शामिल हो गया।

डिस्क्लेमर: धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं विभिन्न ग्रंथों एवं आस्थाओं पर आधारित हैं। श्रद्धालु अपने विश्वास और परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ एवं व्रत का पालन करें। यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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