बंगाल चुनाव के अंतिम चरण में ‘मंदिर पॉलिटिक्स’: मोदी का मतुआ-काली समीकरण, ममता के गढ़ में सेंध की कोशिश
NTN REPORT// कोलकाता/नई दिल्ली | 28 अप्रैल 2026। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है। इससे पहले चुनाव प्रचार थम चुका है, लेकिन आखिरी दौर में सियासी हलचल चरम पर रही। प्रधानमंत्री ने इस चरण में मंदिरों के जरिए धार्मिक-सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति अपनाई, जिसे ‘मंदिर पॉलिटिक्स’ के रूप में देखा जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री अपने मजबूत गढ़ को बचाने में जुटी हैं।

काली मंदिर से दिया बड़ा संदेश
प्रचार के अंतिम दिन पीएम मोदी ने कोलकाता के प्रसिद्ध थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की।
यह मंदिर बंगाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और यहां मां सिद्धेश्वरी की आराधना की जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस दौरे के जरिए बीजेपी ने दो बड़े संदेश देने की कोशिश की—
- बंगाल की सांस्कृतिक-धार्मिक परंपराओं से जुड़ाव दिखाना
- मांसाहार पर प्रतिबंध के विपक्षी आरोपों को खारिज करना
टीएमसी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि बीजेपी सत्ता में आने पर खान-पान की आदतों में दखल दे सकती है। ऐसे में मंदिर जाकर पूजा करना और बंगाली परंपराओं को स्वीकार करना बीजेपी की रणनीतिक चाल माना जा रहा है।
मतुआ समाज पर खास फोकस
पीएम मोदी ने उत्तर 24 परगना में मतुआ ठाकुर मंदिर में भी पूजा की और जनसभा को संबोधित किया।
मतुआ समुदाय बंगाल की लगभग 30 से अधिक सीटों पर प्रभाव रखता है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में।
पीएम ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के जरिए मतुआ समाज को नागरिकता देने के वादे को दोहराया और समुदाय के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया।
राजनीतिक तौर पर देखें तो:
- 2019 लोकसभा चुनाव में मतुआ समर्थन बीजेपी के लिए निर्णायक रहा
- 2021 विधानसभा चुनाव के बाद यह समर्थन कुछ कमजोर पड़ा
- अब बीजेपी फिर से इस वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी है
ममता का किला और बीजेपी की चुनौती
दक्षिण बंगाल, खासकर कोलकाता, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
2021 के चुनाव में इन 142 सीटों में से:
- टीएमसी ने 123 सीटें जीती थीं
- बीजेपी को केवल 18 सीटों पर जीत मिली थी
यही वजह है कि इस बार बीजेपी ने पूरा फोकस इसी इलाके पर रखा है।
सीमा, घुसपैठ और ध्रुवीकरण का मुद्दा
बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों—नादिया, उत्तर 24 परगना और सुंदरबन क्षेत्र—में चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
बीजेपी ने यहां दो बड़े मुद्दे उठाए हैं:
- अवैध घुसपैठ
- तुष्टीकरण की राजनीति
वहीं टीएमसी का आरोप है कि CAA जैसे कानून मतुआ समुदाय को दस्तावेजी जटिलताओं में फंसा सकते हैं।
सियासी ‘स्लॉग ओवर’ में कौन मारेगा बाजी?
चुनाव का यह अंतिम चरण क्रिकेट के ‘स्लॉग ओवर’ जैसा बन गया है, जहां हर दल आखिरी प्रयास में पूरा दम लगा रहा है।
- बीजेपी: धार्मिक और सामाजिक समीकरण के जरिए सेंध लगाने की कोशिश
- टीएमसी: अपने मजबूत वोट बैंक को बचाने की रणनीति
अब नजर 29 अप्रैल के मतदान और उसके नतीजों पर है, जो तय करेंगे कि क्या बीजेपी की ‘मंदिर पॉलिटिक्स’ ममता बनर्जी के अभेद्य किले को भेद पाएगी या नहीं।