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धर्म

शनि की साढ़ेसाती: किस चरण में सबसे ज्यादा कष्ट? जानिए मेष, मीन और कुंभ राशि पर असर कब तक

NTN NEWS REPORT// नई दिल्ली। नवग्रहों में शनि को सबसे धीमी चाल चलने वाला ग्रह माना जाता है। शनि लगभग ढाई वर्ष तक एक राशि में गोचर करता है। वर्तमान में शनि मीन राशि में स्थित है। इस गोचर के चलते मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण, कुंभ राशि पर तीसरा चरण और मेष राशि पर पहला चरण प्रभावी है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि की साढ़ेसाती कुल साढ़े सात वर्षों तक रहती है और इसे तीन चरणों में बांटा जाता है। हर चरण का प्रभाव अलग-अलग तरह से जीवन पर पड़ता है। आइए जानते हैं किस चरण को सबसे कष्टकारी माना जाता है और संबंधित राशियों पर इसका असर कब तक रहेगा।


साढ़ेसाती के तीन चरण: कौन सा होता है सबसे कठिन?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार साढ़ेसाती का दूसरा चरण सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। हालांकि कष्ट का स्तर व्यक्ति की जन्मकुंडली, दशा और कर्म पर भी निर्भर करता है।

तीनों चरणों का सामान्य प्रभाव इस प्रकार है:

  • पहला चरण: अचानक बदलाव और अस्थिरता
  • दूसरा चरण: संघर्ष, दबाव और बड़ी चुनौतियां
  • तीसरा चरण: स्वास्थ्य व आर्थिक उतार-चढ़ाव

मेष राशि: पहला चरण, 2032 तक रहेगा प्रभाव

इस समय मेष राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है, जो वर्ष 2032 तक रहने की संभावना है।

संभावित प्रभाव:

  • नौकरी में परिवर्तन या ट्रांसफर
  • खर्चों में अचानक वृद्धि
  • सिरदर्द या आंखों से जुड़ी परेशानी
  • माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता
  • जीवन में अप्रत्याशित बदलाव

क्या करें उपाय?

पहले चरण में हनुमान जी की पूजा, शनि मंत्र जप और संयमित जीवनशैली अपनाना लाभकारी माना जाता है।


मीन राशि: दूसरा चरण, 2029 तक चुनौतीपूर्ण समय

मीन राशि पर इस समय साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जो वर्ष 2029 तक प्रभावी रहेगा। इसे साढ़ेसाती का सबसे कष्टकारी चरण माना जाता है।

संभावित प्रभाव:

  • करियर में बड़ी चुनौतियां
  • नौकरी या व्यवसाय में जोखिम
  • निर्णय लेने में असमंजस
  • दांपत्य जीवन में तनाव
  • सफलता के लिए अधिक संघर्ष

क्या रखें सावधानी?

  • बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें
  • दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाएं
  • अनुशासन और धैर्य बनाए रखें

कुंभ राशि: तीसरा चरण, 2027 में होगा समाप्त

कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम चरण चल रहा है, जो 2027 में समाप्त होने की संभावना है।

संभावित प्रभाव:

  • स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
  • पुराने रोगों का उभरना
  • आर्थिक अस्थिरता
  • धन अटकने की स्थिति
  • कर्ज और निवेश में सावधानी की जरूरत

क्या करें?

  • कर्ज के लेन-देन से बचें
  • निवेश सोच-समझकर करें
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं

शनि की साढ़ेसाती को पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता। यह समय व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और कर्म का महत्व सिखाता है। जहां एक ओर यह चुनौतियां देता है, वहीं दूसरी ओर मेहनत और ईमानदारी से काम करने वालों को स्थायी सफलता भी प्रदान करता है।

साढ़ेसाती के दौरान संयम, सकारात्मक सोच और धार्मिक आस्था व्यक्ति को मानसिक मजबूती प्रदान करती है।

अस्वीकरण: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। इसकी सामग्री का उद्देश्य केवल सूचना देना है। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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