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भारत

1 मार्च से सिम-बाइंडिंग नियम सख्त, व्हाट्सऐप समेत सभी मैसेजिंग ऐप्स पर पड़ेगा असर

NTN REPORT// नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग नियम को लेकर तस्वीर अब काफी हद तक साफ होती दिख रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार मैसेजिंग ऐप्स के लिए यूजर अकाउंट को एक्टिव सिम से जोड़ना अनिवार्य रहेगा और फिलहाल इस नियम में किसी तरह की ढील देने का सरकार का इरादा नहीं है। 1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में नजर आ रही है।

DoT ने जारी किए स्पष्ट निर्देश
दूरसंचार विभाग (DoT) ने ओटीटी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को साफ निर्देश दिए हैं कि हर यूजर का अकाउंट उसी एक्टिव सिम से जुड़ा होना चाहिए, जिससे रजिस्ट्रेशन किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि फोन में वह सिम मौजूद नहीं है, जिससे व्हाट्सऐप या अन्य ऐप रजिस्टर है, तो ऐप का उपयोग सीमित हो सकता है या पूरी तरह बंद भी किया जा सकता है।
भारत में सबसे अधिक यूजर्स WhatsApp के हैं। बड़ी संख्या में लोग एक ही नंबर से अलग-अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप का उपयोग करते हैं। ऐसे में करोड़ों यूजर्स पर इसका असर पड़ सकता है।

किन यूजर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
सिम-बाइंडिंग नियम लागू होने के बाद उन यूजर्स को परेशानी हो सकती है जिन्होंने एक ही अकाउंट को कई डिवाइस पर एक्टिव कर रखा है। इसके अलावा बार-बार सिम बदलने वाले यूजर्स भी प्रभावित होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार व्हाट्सऐप वेब हर छह घंटे में स्वतः लॉगआउट हो सकता है और दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना अनिवार्य हो सकता है। अनुमान है कि 60 से 80 प्रतिशत तक छोटे कारोबार, जो व्हाट्सऐप पर निर्भर हैं, ऑपरेशनल व्यवधान का सामना कर सकते हैं।

लिंक्ड डिवाइस फीचर पर भी लगेगी सीमा
व्हाट्सऐप का ‘लिंक्ड डिवाइस’ फीचर एक नंबर से कई डिवाइस पर ऐप चलाने की सुविधा देता है। नए नियम के बाद यह फीचर पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, लेकिन इस पर सख्त सीमाएं लग सकती हैं। नियम लागू होने के बाद व्हाट्सऐप मुख्य रूप से उसी फोन में चलेगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन वाला सिम मौजूद होगा। यदि डिवाइस से सिम निकाला गया तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। वर्तमान में लिंक्ड डिवाइस 14 दिनों तक एक्टिव रहता है, लेकिन नए नियमों के बाद बार-बार वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है।

सरकार का तर्क: सुरक्षा सर्वोपरि
रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और सिम-बाइंडिंग नियमों में बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड, फर्जी नंबर और ऑनलाइन ठगी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर और नकली प्रोफाइल के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। सरकार का तर्क है कि यदि हर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और वास्तविक सिम से जुड़ा रहेगा, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा।

टेक कंपनियों ने जताई चिंता
कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री समूहों ने इस नियम को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक मैसेजिंग कंपनियों ने DoT के दिशा-निर्देशों पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी दायरे और यूजर प्राइवेसी से जोड़कर देखा है। हालांकि सरकार की ओर से नियम वापस लेने या टालने का कोई संकेत नहीं मिला है।

सिर्फ व्हाट्सऐप नहीं, अन्य ऐप्स भी दायरे में
यह नियम केवल व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं रहेगा। Telegram, Signal समेत अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में आ सकते हैं। यानी यह एक व्यापक नीति बदलाव हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा।

1 मार्च की डेडलाइन पर टिकी निगाहें
खबरों के मुताबिक 1 मार्च के बाद नियम पूरी तरह लागू माने जाएंगे। कंपनियों को तकनीकी बदलाव के लिए समय दिया गया था, लेकिन अब सख्ती के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि आम यूजर्स के लिए अभी तक कोई अलग से आधिकारिक सार्वजनिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
फिलहाल साफ संकेत यही हैं कि सिम-बाइंडिंग नियम पर सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजर भी इसी पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियम किस रूप में लागू होता है और आम यूजर के अनुभव में कितना बदलाव आता है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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