
सुप्रीम कोर्ट ने कहा — CJI पर जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई नहीं होगी
NTN NEWS REPORT// नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने के लिए इच्छुक नहीं है। अदालत ने कहा कि स्वयं CJI ने उस वकील के खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, यह घटना न्यायालय की कार्यवाही के दौरान हुई थी, जब वकील राकेश किशोर ने अदालत में नारे लगाते हुए CJI की ओर जूता फेंक दिया था। इस घटना से क्षुब्ध मुख्य न्यायाधीश ने अदालत के अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों से कहा था कि इस मामले को नजरअंदाज किया जाए और आरोपी वकील को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए।
इस घटना की देशभर में निंदा हुई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रधान न्यायाधीश से फोन पर बात की थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत में नारे लगाना और जूते फेंकना निश्चित रूप से अदालत की अवमानना का मामला है, लेकिन यह संबंधित न्यायाधीश पर निर्भर करता है कि वह आगे कार्रवाई करना चाहते हैं या नहीं।
पीठ ने कहा — “यदि अवमानना नोटिस जारी किया गया तो इससे CJI पर जूता फेंकने वाले वकील को अनावश्यक महत्व मिलेगा और घटना की अवधि बढ़ जाएगी। अतः इस मामले को यहीं समाप्त किया जाना उचित है।”
पीठ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 71 वरिष्ठ वकीलों ने राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग की थी। यह घटना 6 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान घटी थी।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines) बनाए जाएंगे। इसके लिए अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि देश की विभिन्न अदालतों में इस तरह की जूता फेंकने या अपमानजनक घटनाओं का विवरण एकत्र कर प्रस्तुत करें।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को यह भी टिप्पणी की थी कि “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग दूसरों की गरिमा और संस्था की मर्यादा की कीमत पर नहीं किया जा सकता।”