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भारत

प्रशांत महासागर में 8,046 KM लंबी समुद्री गर्मी की लहर, 1877 के बाद सबसे ताकतवर ‘मेगा अल-नीनो’ का खतरा

वैज्ञानिकों ने 2026–27 में भीषण गर्मी, सूखा और फसल संकट की चेतावनी दी

NTN NEWS REPORT// प्रशांत महासागर में करीब 8,046 किलोमीटर लंबी समुद्री गर्मी की लहर (Marine Heatwave) फैल चुकी है, जिसने संभावित “मेगा अल-नीनो” को और मजबूती दे दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह रफ्तार बनी रही तो 2026–27 के दौरान दुनिया को भीषण गर्मी, व्यापक सूखे और फसलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह 1877 के बाद अब तक का सबसे शक्तिशाली अल-नीनो बन सकता है।

फाइल फोटो

1877 जैसा खतरा क्यों?

इतिहास बताता है कि 1877 के दौरान आए भीषण अल-नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में भयंकर सूखा, गर्मी और बीमारियां फैली थीं। उस समय वैश्विक आबादी का लगभग 4% प्रभावित हुआ था। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समुद्री परिस्थितियां उसी तरह के चरम पैटर्न की ओर संकेत कर रही हैं।


क्या है अल-नीनो और क्यों है यह खतरनाक?

अल-नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

  • यह आमतौर पर हर 2 से 7 साल में आता है।
  • लेकिन इस बार इसके “सुपर” या “मेगा” स्तर तक पहुंचने की आशंका है।

इस बार के प्रमुख कारण:

  • विशाल समुद्री गर्मी की लहर
  • पॉजिटिव पैसिफिक मेरिडियनल मोड
  • गर्म दक्षिणी हवाएं

मौसम वैज्ञानिक बेन नॉल समेत कई विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी अल-नीनो को तेजी से मजबूत कर रही है।


माइक्रोनेशिया से कैलिफोर्निया तक फैली ‘द ब्लॉब’

यह समुद्री गर्मी की लहर माइक्रोनेशिया से शुरू होकर कैलिफोर्निया तक पहुंच चुकी है। कैलिफोर्निया के पास इसे “द ब्लॉब” कहा जा रहा है, जहां समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया है।
NOAA की रिपोर्ट के अनुसार यह गर्म क्षेत्र बेहद विशाल और असामान्य है।

इसके प्रभाव:

  • समुद्री जीव-जंतुओं पर गंभीर असर
  • मछलियों के प्रवास पैटर्न में बदलाव
  • तूफानों की तीव्रता में वृद्धि
  • वैश्विक मौसम प्रणाली में अस्थिरता

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पैटर्न पिछले 140 साल में सबसे ताकतवर हो सकता है।


दुनिया पर संभावित असर

मेगा अल-नीनो का प्रभाव वैश्विक होगा और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में दिखाई देगा।

इन क्षेत्रों में सूखा और गर्मी:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • दक्षिणी और मध्य अफ्रीका
  • भारत
  • अमेजन के जंगल

यहां जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।

इन क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़:

  • अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा
  • कुछ दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र

अन्य प्रभाव:

  • उत्तरी अमेरिका में असामान्य गर्मी
  • एशिया और अफ्रीका में कृषि संकट
  • तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता में वृद्धि

कुल मिलाकर वैश्विक मौसम पैटर्न पूरी तरह उलट सकता है।


भारत पर क्या होगा असर?

भारत इस संभावित मेगा अल-नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल हो सकता है।

1. भीषण गर्मी

2026 की गर्मियों में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रह सकता है।
दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर भारत में अप्रैल में ही 40 डिग्री सेल्सियस पार हो चुका है। अल-नीनो के प्रभाव से प्री-मानसून गर्मी और तेज हो सकती है।

2. कमजोर मानसून

जून से सितंबर तक का दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे की स्थिति
  • जल संकट की आशंका
  • बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी

3. कृषि पर असर

  • खरीफ फसलों को नुकसान
  • उत्पादन में गिरावट
  • खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना

4. बढ़ेगी उमस

नमी ज्यादा होने से “ह्यूमिड हीट” का असर बढ़ेगा, जिससे गर्मी ज्यादा महसूस होगी और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ेगा।


क्या बन सकती है वैश्विक आपदा?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समुद्री तापमान में गिरावट नहीं आई तो 2026–27 का अल-नीनो एक बड़ी वैश्विक आपदा का रूप ले सकता है।

  • खाद्य संकट
  • जल संकट
  • स्वास्थ्य आपात स्थिति
  • प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी

वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि दुनिया को असामान्य और चरम मौसम का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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