हाईकोर्ट की छत पर नमाज की अनुमति तो दुर्गा पूजा क्यों नहीं? याचिका पर रजिस्ट्रार से जवाब तलब, 12 अक्टूबर तक मांगी रिपोर्ट
NTN REPORT// कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट परिसर की छत पर धार्मिक प्रार्थना को लेकर एक जनहित याचिका के बाद मामला चर्चा में है। याचिकाकर्ता संजय घोष ने सवाल उठाया है कि यदि हाईकोर्ट की छत पर शुक्रवार को एक विशेष समुदाय के लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाती है, तो उसी स्थान पर दुर्गा पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार से इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

रजिस्ट्रार को मौके का निरीक्षण करने का निर्देश
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट करने के लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से जवाब मांगा कि क्या वास्तव में हाईकोर्ट की छत पर किसी धार्मिक समुदाय को नियमित रूप से प्रार्थना करने की अनुमति दी गई है।
अदालत ने रजिस्ट्रार को स्वयं मौके पर जाकर स्थल निरीक्षण करने और वहां की वास्तविक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट 12 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करनी है।
संजय घोष ने दाखिल की जनहित याचिका
यह जनहित याचिका अधिवक्ता संजय घोष की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि न्यायालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों के लिए समान मानदंड लागू होने चाहिए।
याचिकाकर्ता का दावा है कि यदि हाईकोर्ट की छत पर प्रत्येक शुक्रवार को एक विशेष समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति है, तो दूसरे धर्म के लोगों को भी उसी आधार पर वहां दुर्गा पूजा अथवा अन्य धार्मिक आयोजन की अनुमति मांगने का अधिकार होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने धार्मिक समानता का उठाया सवाल
संजय घोष के अनुसार, संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता देता है और राज्य की व्यवस्था धार्मिक तटस्थता पर आधारित है। उनका तर्क है कि यदि एक धार्मिक समुदाय के लिए न्यायालय परिसर में प्रार्थना की व्यवस्था स्वीकार्य है, तो अन्य समुदायों के लिए भी समान अवसर का प्रश्न उठता है।
हालांकि, ये सभी तर्क याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए दावे और दलीलें हैं। अदालत ने अभी इन दावों को सही ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। फिलहाल रजिस्ट्रार से वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले भी खारिज हो चुकी है दुर्गा पूजा से जुड़ी याचिका
इस मामले की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी है कि 25 सितंबर 2026 को इसी खंडपीठ ने हाईकोर्ट की छत पर दुर्गा पूजा आयोजित करने की अनुमति मांगने वाली एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उस याचिका को जनहित का मामला नहीं माना था।
अब सामने आए ताजा घटनाक्रम में अदालत का ध्यान इस सवाल पर गया है कि हाईकोर्ट की छत पर किसी धार्मिक प्रार्थना की अनुमति या प्रचलन वास्तव में है या नहीं। इसी तथ्य की जांच के लिए रजिस्ट्रार को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
12 अक्टूबर की रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल अदालत ने इस मामले में धार्मिक आयोजन की अनुमति देने या न देने को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। 12 अक्टूबर तक रजिस्ट्रार की रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की सुनवाई और दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नोट: इस खबर में धार्मिक गतिविधियों से संबंधित दावे याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप/दलीलों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। अदालत द्वारा इन दावों की तथ्यात्मक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।