
यूपी में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनावी संग्राम, 37 वोट का आंकड़ा अहम
बीजेपी, सपा और बसपा के बीच बदलेगा सियासी गणित; राज्यसभा चुनाव के बाद विधान परिषद पर भी नजर
NTN REPORT// लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले कुछ सप्ताह राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहने वाले हैं। राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और उसी दिन शाम को मतगणना की जाएगी। इसके बाद विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा।
राज्यसभा की 10 सीटों में से आठ पर फिलहाल बीजेपी के सदस्य हैं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है। इन सदस्यों का नियमित कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। बीजेपी के डॉ. दिनेश शर्मा की सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है, क्योंकि उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल का पद संभालने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दिया था।
इन राज्यसभा सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल
उत्तर प्रदेश से जिन प्रमुख राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें बीजेपी के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, नीरज शेखर, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य और बीएल वर्मा शामिल हैं। डॉ. दिनेश शर्मा की सीट इस्तीफे के कारण पहले ही रिक्त हो चुकी है।
वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर होगी। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
37 विधायकों का आंकड़ा क्यों है महत्वपूर्ण?
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या और रिक्तियों के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वाले वोट का आंकड़ा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी गणित के कारण विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या और सहयोगी दलों का समर्थन राज्यसभा की सीटों के बंटवारे में अहम भूमिका निभाएगा।
बीजेपी के सामने आठ सीटों का गणित, सपा के खाते में दो सीटों की संभावना
मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। विभिन्न राजनीतिक आकलनों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को आठ सीटों तक पहुंचने की स्थिति में बताया जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी के पास दो सीटों के लिए आवश्यक संख्या का गणित बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों, प्रथम वरीयता के वोटों, गठबंधन और मतदान के दौरान बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगी।
राज्यसभा चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवारों के चुनाव की स्थिति में दूसरी वरीयता के वोट भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यही वजह है कि बचने वाले वोटों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति पर नजर रहेगी।
बसपा के सामने राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बचाए रखने की चुनौती
बहुजन समाज पार्टी के लिए यह चुनाव विशेष महत्व रखता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल बसपा का कोई विधायक नहीं है और राज्यसभा में पार्टी के एकमात्र सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
ऐसे में यदि पार्टी इस चुनाव में नई सीट हासिल नहीं कर पाती है तो उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व समाप्त हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी चर्चा है कि बसपा को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए अन्य दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।
विधान परिषद की 11 सीटों पर भी होगी परीक्षा
राज्यसभा चुनाव के कुछ ही दिनों बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी चुनाव होगा। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान की तारीख निर्धारित की है। इन चुनावों की अधिसूचना भी 29 सितंबर को जारी होगी।
इस तरह अक्टूबर का महीना उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर दलों की ताकत और रणनीति की परीक्षा होगी और उसके बाद विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में राजनीतिक दल अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करेंगे।
उम्मीदवारों के नाम पर बढ़ेगी हलचल
चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद अब बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बसपा और अन्य दलों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन तेज होने की उम्मीद है। राज्यसभा की सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक भूमिका, राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की जरूरतें महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
विधान परिषद चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच रणनीति तैयार की जा रही है। दोनों चुनावों के बीच कम अंतर होने के कारण अक्टूबर में उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बैठकों, दावों और समीकरणों का दौर देखने को मिल सकता है।
यूपी की राजनीति में अक्टूबर बनेगा अहम मोड़
राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए विधानसभा में मौजूद विभिन्न दलों की मौजूदा ताकत और सहयोगी दलों के बीच तालमेल की भी तस्वीर सामने आएगी।
खास तौर पर राज्यसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास मौजूद संख्या, समाजवादी पार्टी की सीटों का गणित और बसपा के राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का सवाल सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला है।
चुनाव कार्यक्रम एक नजर में
- राज्यसभा की उत्तर प्रदेश की सीटें: 10
- राज्यसभा मतदान: 16 अक्टूबर 2026
- मतगणना: 16 अक्टूबर, शाम 5 बजे
- राज्यसभा अधिसूचना: 29 सितंबर 2026
- नामांकन की अंतिम तारीख: 6 अक्टूबर
- नाम वापसी: 9 अक्टूबर
- विधान परिषद की सीटें: 11
- विधान परिषद मतदान: 23 अक्टूबर 2026
- वर्तमान राज्यसभा सीटों में बीजेपी: 8
- समाजवादी पार्टी: 1
- बहुजन समाज पार्टी: 1
- समाप्त होने वाला नियमित कार्यकाल: 25 नवंबर 2026
स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग एवं उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टें।यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।