
फ़िल्म ‘हाल’ में आरएसएस को ‘दंगाई और गुंडा’ बताने पर मचा बवाल, हाईकोर्ट पहुंचा संघ कार्यकर्ता — कल होगी सुनवाई
NTN NEWS REPORT// राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर विवादित टिप्पणी और अपमानजनक चित्रण करने के आरोप में मलयालम फ़िल्म “हाल” एक बड़े विवाद में घिर गई है। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने फिल्म में संगठन की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में यह मामला अब शुक्रवार 31 अक्टूबर को सुनवाई के लिए तय किया गया है।

फ़िल्म में आरएसएस को कथित तौर पर “दंगाई, गुंडागर्दी करने वाला और असभ्य संगठन” के रूप में दिखाया गया है। याचिकाकर्ता ने अपने निवेदन में कहा कि यह चित्रण संगठन और उसके लाखों स्वयंसेवकों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है। याचिका में कहा गया —
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को एक दंगाई और असभ्य संगठन के रूप में अपमानित किया गया है। यदि ऐसे दृश्य प्रसारित करने की अनुमति दी गई, तो इससे 40 लाख से अधिक स्वयंसेवकों और समर्थकों की भावनाएं आहत होंगी।”
आरएसएस कार्यकर्ता की ओर से दायर इस याचिका में यह भी कहा गया है कि फ़िल्म का उद्देश्य संघ की राष्ट्रनिर्माण में निभाई जा रही भूमिका को कमजोर करना और उसकी सकारात्मक छवि को धूमिल करना है।
🎬 फ़िल्म ‘हाल’ पहले भी रही विवादों में
शेन निगम अभिनीत यह फ़िल्म पहले भी विवादों का केंद्र रही है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने बीफ़ बिरयानी खाने के दृश्य और एक गाने में नायिका द्वारा मुस्लिम धार्मिक पोशाक पहनने वाले सीन पर आपत्ति जताई थी और कई कट लगाने का सुझाव दिया था। बाद में फिल्म को “ए” प्रमाणपत्र दिया गया, जिसे निर्माता और निर्देशक ने अदालत में चुनौती दी।
वहीं, एक ईसाई संगठन ने भी कोर्ट में पक्षकार बनने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि फ़िल्म में थमारस्सेरी बिशप को “लव जिहाद” का समर्थक दिखाया गया है, जिससे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद न्यायालय ने 25 अक्टूबर को प्रतिवादियों और वकीलों के साथ मिलकर फिल्म देखने का निर्णय लिया था।
⚖️ अब संघ के समर्थन में अदालत पहुंचा पदाधिकारी
अब संघ से जुड़े एक कार्यकर्ता ने यह कहते हुए नई याचिका दायर की है कि फिल्म के जरिए आरएसएस को आक्रामक, हिंसक और समाज-विरोधी संगठन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जबकि संघ का असली स्वरूप राष्ट्रसेवा, सामाजिक एकता, और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
🌿 आरएसएस की सकारात्मक भूमिका
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1925 से राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण, शिक्षा, सेवा और सामाजिक एकता के कार्यों में सक्रिय है। बाढ़, भूकंप और महामारी जैसी आपदाओं में संघ के स्वयंसेवकों ने राहत और पुनर्वास कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है। समाज के वंचित तबकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार के साथ-साथ ग्रामीण विकास के अनेक प्रकल्पों में आरएसएस की भागीदारी रही है।
अगली सुनवाई आज
जस्टिस वी.जी. अरुण की पीठ ने संघ पदाधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई को शुक्रवार (31 अक्टूबर) तक के लिए स्थगित कर दिया है। मामले का शीर्षक है — जुबी थॉमस एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य।
अब सबकी नज़रें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि फ़िल्म “हाल” का विवादित प्रदर्शन जारी रहेगा या संघ के अपमानजनक दृश्यों पर रोक लगेगी।