Advertisment
जांजगीर-चांपाअन्य खबरेंशिक्षा

ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल बनारी जांजगीर के विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण एवं पिकनिक ले जाया गया

JANJGIR CHAMPA// ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल बनारी जांजगीर में संस्था के संचालक आलोक अग्रवाल एवं प्राचार्या श्रीमती सोनाली सिंह के निर्देशन में आज दिनांक 12 दिसम्बर 2024 को संस्था के कक्षा छठवीं से कक्षा बारहवीं तक के विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण एवं पिकनिक के लिये श्री सांदीपनी विज्ञान संस्थान महाविद्यालय राहौद, श्री दूधाधारी मठ शिवरीनारायाण मंदिर एवं देवरघटा नदी किनारे पिकनिक के लिये ले जाया गया।

सर्वप्रथम समस्त विद्यार्थियों को शिक्षकों की देख-रेख में संस्था प्रागंण से बस के द्वारा श्री सांदीपनी विज्ञान संस्थान महाविद्यालय राहौद ले जाया गया। वहाँ पहुँचते ही महाविद्यालय परिवार द्वारा ब्रिलियंट परिवार का तिलक चंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। साथ ही संस्था द्वारा हमारे विद्यार्थियों के लिये स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी। तत्पष्चात् महाविद्यालय संस्थान के प्राचार्य एस.के. गुप्ता एवं प्रभारी प्राचार्या नेहा मिश्रा द्वारा हमारे संस्था संचालक  आलोक अग्रवाल, श्रीमती प्रणिता अग्रवाल एवं प्राचार्या श्रीमती सोनाली सिंह जी का पुष्प गुच्छ प्रतीक चिन्ह एवं श्री भगवद् गीता देकर सम्मान किया गया।

प्राचार्य एस.के. गुप्ता द्वारा संस्था परिवार को संबोधित करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। हमारे संस्था के संचालक आलोक अग्रवाल ने महाविद्यालय परिवार को भव्य स्वागत उपहार एवं स्वल्पाहार व्यवस्था के लिये धन्यवाद देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान महाविद्यालय में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। विद्यार्थियों एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा महाविद्यालय भवन के पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला का भ्रमण करते हुए विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त की गई।

वहाँ से विद्यार्थियों को श्री दूधाधारी मठ शिवरीनारायाण मंदिर ले जाया गया जिसमें मुख्य रूप से- दुधाधारी मठ, राम-जानकी मंदिर, वन गमन पथ, माँ अन्नापूर्णा मंदिर एवं महानदी के विहंगम पाट का दर्षन कराया गया। वहाँ पर विद्यार्थियों ने प्राचीन कालीन शिवरीनारायाण मंदिर की विषेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की विद्यार्थियों ने भ्रमण के माध्यम से जाना कि शिवरीनारायाण एवं चन्द्रचूड मंदिर एक ही बाहर दीवार के अंदर स्थित है। दोनों मंदिर की बाह्य भित्ति अलंकरण विहीन है शिवरीनारायाण का मंदिर विष्णु को समर्पित है, जो लगभग 9वीं-10वीं शताब्दी ईस्वी का स्वीकार किया जाता है, जबकि चन्द्रचूड मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे 12वीं शताब्दी ईस्वी का स्वीकार किया जाता है। चन्द्रचूड मंदिर दक्षिण दीवार पर कल्चुरि संवत् 919 (1167 ईस्वी) का एक अभिलेख प्राप्त होता है जो देव नागरी लिपि एवं संस्कृति भाषा में उत्कीर्ण है जिसमें कल्चुरियों की वंशावली जाजल्लदेव द्वितीय तक दी गई है।

इस शिलालेख में अमानदेव द्वारा चिंचली गांव के दान का उल्लेख है, जो कलचुरी वंश की एक संपार्श्विक शाखा का वंशज और विकर्णदेव द्वारा मन्दिर के सामने एक दुर्गा मन्दिर के निर्माण का उल्लेख है, जो अमानदेव का चाचा था। इसमें कलचुरी वंश के आदि पूर्वज के रूप में चन्द्रमा का उल्लेख है। इस भ्रमण के माध्यम स विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार की ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।

उसके बाद विद्यार्थियों को देवरघटा नदी किनारे पिकनिक के ले जाया गया। जहाँ पर विद्यार्थियों के लिये नास्ते और खाने का प्रबंध संस्था द्वारा किया गया था। नदी किनारे पहुँचते ही वहाँ के खुबसूरत दृश्य एवं पेड-पौधो को देखकर विद्यार्थीगण उत्साह एवं उमंग से भर उठे। विद्यार्थीगण संस्था संचालक, प्राचार्या, शिक्षक-शिक्षिकाओं की देख-रेख में भिन्न-भिन्न प्रकार के खेल एवं गतिविधियों में प्रतिभागी बने।

तत्पश्चात विद्यार्थियों को कक्षावार भोजन कराया गया। देवरघटा से सभी विद्यार्थियो को लगभग 5:00 बजे बस के माध्यम से संस्था प्रांगण लाया गया तथा शिक्षकों की देख-रेख में सकुशल उनके घर तक पहुंचाया गया। इस शैक्षणिक एवं पिकनिक भ्रमण में लगभग 200 विद्यार्थी, 50 शिक्षक शिक्षिकाएं एवं 50 संस्था गत कर्मचारी शामिल हुए। इस भ्रमण के सफल संचालन में संस्था के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं एडमिन स्टाफ एवं ग्राउंड लेवल स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!