
स्मार्ट ग्लास पर उठे प्राइवेसी के सवाल: Meta-Ray-Ban डिवाइस की रिकॉर्डिंग और डेटा उपयोग को लेकर नई रिपोर्ट से चिंता!
AI ट्रेनिंग के लिए वीडियो क्लिप्स तक मानव मॉडरेटर्स की पहुंच होने का दावा, कंपनी ने कहा—प्राइवेसी सुरक्षा के लिए कई उपाय लागू!
NTN REPORT// नई दिल्ली, 6 मार्च। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वेयरेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच स्मार्ट ग्लास को भविष्य की बड़ी तकनीक माना जा रहा है। इसी कड़ी में Meta और Ray-Ban द्वारा विकसित स्मार्ट ग्लास चर्चा में हैं। हालांकि हाल ही में सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के बाद इन डिवाइसों को लेकर प्राइवेसी से जुड़े गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं।

स्वीडन के अखबार Svenska Dagbladet की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार Meta-Ray-Ban स्मार्ट ग्लास से रिकॉर्ड होने वाली कुछ वीडियो क्लिप्स AI सिस्टम को ट्रेन करने की प्रक्रिया में मानव डेटा एनोटेटर्स तक भी पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन क्लिप्स को देखने वाले कर्मचारी वीडियो में मौजूद ऑब्जेक्ट या गतिविधियों की पहचान करके AI मॉडल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
हालांकि कंपनी का कहना है कि उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी और नीतिगत उपाय लागू किए गए हैं।
AI ट्रेनिंग के लिए डेटा प्रोसेसिंग का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, Meta अपने AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में फोटो और वीडियो डेटा का उपयोग करती है। इस प्रक्रिया में कुछ क्लिप्स को “डेटा एनोटेशन” के लिए कर्मचारियों द्वारा देखा और टैग किया जाता है।
बताया गया है कि इस काम में केन्या के नैरोबी स्थित एक आउटसोर्सिंग कंपनी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं, जो वीडियो या तस्वीरों में दिखाई देने वाली वस्तुओं की पहचान कर AI मॉडल को ट्रेन करने में मदद करते हैं।
रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों के हवाले से दावा किया गया है कि उन्हें ऐसे वीडियो भी देखने को मिले जिनमें लोग निजी परिस्थितियों में दिखाई दे रहे थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन रिकॉर्डिंग्स के लिए संबंधित लोगों की जानकारी या सहमति किस स्तर तक ली गई थी।
कैसे काम करते हैं स्मार्ट ग्लास
Meta और Ray-Ban द्वारा विकसित स्मार्ट ग्लास देखने में सामान्य सनग्लास जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें कई डिजिटल फीचर शामिल होते हैं, जैसे:
- फ्रेम में लगा छोटा कैमरा
- माइक्रोफोन और स्पीकर
- फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग
- लाइव स्ट्रीमिंग
- वॉयस कमांड से AI असिस्टेंट का उपयोग
उपयोगकर्ता इन ग्लास के माध्यम से फोटो लेकर किसी स्थान या वस्तु के बारे में AI से जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसी वजह से टेक कंपनियां इन्हें भविष्य के कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में देख रही हैं।
प्राइवेसी को लेकर क्यों बढ़ रही चिंता
स्मार्ट ग्लास को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि कैमरा सीधे उपयोगकर्ता के चेहरे पर लगा होता है और कई बार आसपास के लोगों को यह पता नहीं चलता कि रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं।
कंपनी ने इस समस्या को कम करने के लिए ग्लास में एक LED इंडिकेटर लाइट दी है, जो रिकॉर्डिंग के दौरान जलती है। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रोशनी या भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह लाइट आसानी से दिखाई नहीं देती।
इसके अलावा यह भी आशंका जताई जा रही है कि अगर ऐसी तकनीक भविष्य में फेस रिकग्निशन सिस्टम के साथ जुड़ जाती है तो सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की पहचान करना और भी आसान हो सकता है।
कानूनी स्थिति और चुनौतियां
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट ग्लास जैसी नई तकनीकें कई देशों में मौजूदा गोपनीयता कानूनों के लिए चुनौती बन सकती हैं।
भारत सहित कई देशों में सार्वजनिक स्थानों पर वीडियो रिकॉर्डिंग आम तौर पर अवैध नहीं मानी जाती, लेकिन किसी व्यक्ति की निजी गतिविधियों को बिना अनुमति रिकॉर्ड करना या उसका दुरुपयोग करना कानून के दायरे में आ सकता है।
डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वेयरेबल कैमरा डिवाइसों को लेकर स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश बनाना जरूरी हो सकता है।
कंपनी का पक्ष
Meta ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कंपनी उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी को गंभीरता से लेती है। कंपनी के अनुसार:
- रिकॉर्डिंग के समय LED लाइट संकेत देती है
- डेटा सुरक्षा के लिए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू है
- AI सिस्टम के प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए जाने वाले डेटा पर नियंत्रण और नीतियां लागू हैं
कंपनी का यह भी कहना है कि उपयोगकर्ताओं को अपने डिवाइस के इस्तेमाल और डेटा शेयरिंग सेटिंग्स पर नियंत्रण दिया जाता है।
भविष्य की तकनीक, लेकिन सवाल भी बड़े
तकनीकी कंपनियां स्मार्ट ग्लास को अगली पीढ़ी का कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म मान रही हैं। जिस तरह स्मार्टफोन ने रोजमर्रा की जिंदगी को बदल दिया, उसी तरह स्मार्ट ग्लास भी आने वाले वर्षों में आम उपयोग का हिस्सा बन सकते हैं।
लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी जुड़ा हुआ है—अगर हर व्यक्ति के चेहरे पर कैमरा मौजूद होगा, तो क्या समाज एक व्यापक निगरानी प्रणाली की ओर बढ़ जाएगा?
इस सवाल का जवाब फिलहाल तकनीक, कानून और समाज के बीच संतुलन पर ही निर्भर करेगा।