
जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : बीमा कंपनी को 22 लाख रुपये देने का आदेश
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-चांपा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए बजाज एलियांज लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी को बीमा राशि 22 लाख रुपये उपभोक्ता को चुकाने का निर्देश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 22 लाख रुपये के साथ ही मुकदमे का खर्च 5 हजार रुपये तथा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 50 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह मामला परसदा, तहसील अकलतरा निवासी उपभोक्ता/शिकायतकर्ता सुरेश यादव से जुड़ा है। उनके पिता गर्जन यादव ने अपने जीवनकाल में बजाज एलियांज लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी, कोरबा से एक बीमा पॉलिसी ली थी। यह पॉलिसी 23 मार्च 2024 से 19 मार्च 2065 तक 41 वर्षों के लिए थी, जिसमें शिकायतकर्ता नामिनी थे। बीमा धारक ने प्रथम वार्षिक प्रीमियम 2,04,820 रुपये जमा भी कर दिया था।
बीमा धारक की मृत्यु 4 जून 2024 को हार्टबीट व सांस बढ़ने से हुई। नामिनी सुरेश यादव ने कंपनी के समक्ष बीमा राशि का दावा प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 26 सितंबर 2024 को दावा निरस्त करते हुए आरोप लगाया कि बीमित व्यक्ति ने अपने चिकित्सा इतिहास को छिपाया और गलत जानकारी दी थी। कंपनी का कहना था कि बीमित व्यक्ति पॉलिसी लेने के पहले से पक्षाघात (लकवा) से पीड़ित था और उसी कारण उसकी मृत्यु हुई है। इस आधार पर कंपनी ने बीमा राशि देने से इनकार कर दिया।
इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने 29 जनवरी 2025 को जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर-चांपा में शिकायत दर्ज की। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी और सदस्य महिमा सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें व दस्तावेजों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि बीमा धारक ने कोई गलत जानकारी नहीं दी थी और बीमा लेने से पूर्व किसी बीमारी से पीड़ित नहीं थे। वहीं, बीमा कंपनी अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।
आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने बिना उचित कारण उपभोक्ता का दावा खारिज कर सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण किया है। इस पर आयोग ने कंपनी को आदेशित किया कि वह उपभोक्ता को 22 लाख रुपये बीमा राशि, 5 हजार रुपये मुकदमे का खर्च और 50 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति 45 दिनों के भीतर अदा करे। तय अवधि में भुगतान न होने पर उक्त राशि पर आदेश दिनांक से भुगतान दिनांक तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
यह आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत पारित किया गया है।