
नई दिल्ली // भारत ने डिजिटल पेमेंट के मामले में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में रियल टाइम पेमेंट का ग्लोबल लीडर बन गया है. जून 2024 में यूपीआई (UPI) से रिकॉर्ड 24.03 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जो करीब 18.4 अरब ट्रांजैक्शंस के जरिए हुआ. ये पिछले साल जून की तुलना में 32 फीसदी ज्यादा है।
आईएमएफ ने बताया कि भारत में होने वाले सभी डिजिटल पेमेंट्स में 85 फीसदी हिस्सा UPI का है. वहीं, दुनियाभर में जितने भी रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट होते हैं, उनमें आधे से ज्यादा भारत के यूपीआई के जरिए होते हैं।
रोज हो रहे 64 करोड़ ट्रांजैक्शन : रिपोर्ट के मुताबिक, UPI अब रोजाना 64 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन करता है, जो ग्लोबल पेमेंट कंपनी वीजा से भी ज्यादा है. वीजा रोजाना करीब 63.9 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस करती है।
UPI से जुड़े हैं 675 बैंक : UPI को 2016 में लॉन्च किया गया था और सिर्फ 9 साल में इसने 49 करोड़ लोगों और 6.5 करोड़ व्यापारियों तक अपनी पहुंच बना ली है. यह 675 बैंकों को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ता है. IMF ने कहा कि UPI ने भारत में खासकर छोटे शहरों और गांवों में लोगों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।
दुनियाभर में UPI का डंका : आज यूपीआई की पहुंच भारत से बाहर भी फैल चुकी है. यह अब यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस जैसे 7 देशों में काम करता है. फ्रांस में इसकी शुरुआत यूरोप में भारतीय टेक्नोलॉजी की एंट्री मानी जा रही है।
ग्लोबल डिजिटल पेमेंट का नया चेहरा : भारत अब ब्रिक्स (BRICS) देशों में भी यूपीआई को पेमेंट स्टैंडर्ड के रूप में अपनाने की वकालत कर रहा है. अगर ऐसा होता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन और भी तेज, आसान और सस्ता हो जाएग. आईएमएफ ने कहा कि यह सब भारत के मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को लेकर दूरदर्शी सोच का नतीजा है. यूपीआई सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि अब ग्लोबल डिजिटल पेमेंट का नया चेहरा बन गया है।