
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक दिन: पांच देशों के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत के साथ पीठ पर बैठे
NTN REPORT//नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025। भारत के सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब भूटान, श्रीलंका, केन्या, मॉरीशस के मुख्य न्यायाधीश तथा नेपाल सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत के साथ अदालत की पीठ पर बैठकर कार्यवाही का अवलोकन किया। यह क्षण न केवल अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग का प्रतीक बना, बल्कि भारत की न्यायिक प्रतिष्ठा का भी प्रमाण साबित हुआ।

सीजेआई सूर्यकांत ने सभी अतिथि न्यायाधीशों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इस अवसर को “ऐतिहासिक” बताया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी भारत सरकार की ओर से अतिथियों का अभिनंदन किया।
कौन-कौन बैठे पीठ पर
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची के साथ निम्नलिखित गणमान्य न्यायाधीश पीठ पर शामिल हुए—
भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो नोरबू त्शेरिंग केन्या की मुख्य न्यायाधीश मार्था कूमे। मॉरीशस की मुख्य न्यायाधीश रेहाना बीबी मुंगल्य-गुलबुल श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पद्मन सुरसेना। नेपाल सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला
इसके अतिरिक्त मलेशिया फ़ेडरल कोर्ट की तन श्री दातुक नलिनी पाठमनाथन, श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस थुरैराजा पी.सी. और जस्टिस एएचएमडी नवाज़ भी कोर्टरूम में उपस्थित रहे।
अतिथि न्यायाधीशों ने भारत की न्यायिक परंपरा को सराहा
केन्या की मुख्य न्यायाधीश मार्था कूमे ने कहा कि केन्या की अदालतें “भारत के न्यायिक क्षेत्र को आदर्श मानती हैं” और भारतीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का नियमित रूप से अनुसरण करती हैं। उन्होंने कानून के शासन को मजबूत करने के लिए भविष्य में और सहयोग की आशा व्यक्त की।
मॉरीशस की मुख्य न्यायाधीश रेहाना मुंगल्य-गुलबुल ने भारतीय न्यायशास्त्र को अपने देश की न्याय प्रणाली के लिए मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि वह इस समारोह का हिस्सा बनकर “अत्यंत प्रसन्न” हैं।
भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो त्शेरिंग ने भारत की संवैधानिक यात्रा की विशेष सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संविधान “मानवता की सेवा” के सर्वोत्तम उद्देश्य को पूरा करता है। उन्होंने मज़ाक में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने जितने वकील देखे, उतने उनके पूरे शहर में भी नहीं दिखते।
श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पद्मन सुरसेना ने इसे “गहरा सम्मान” बताया और कहा कि भारत और श्रीलंका की न्यायिक परंपराएँ, कानून और दलीलें एक जैसी हैं, जो दोनों देशों की ऐतिहासिक साझेदारी को मज़बूती प्रदान करती हैं।
नेपाल की वरिष्ठ न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला ने भारत में हो रहे तेज़ न्यायिक सुधारों और डिजिटल परिवर्तन की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेपाल की न्यायपालिका को पहली बार इस प्रकार सीधे आमंत्रण दिया गया है, जो अत्यंत उत्साहजनक है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी किया सम्मान
इससे पहले, सभी अतिथि न्यायाधीशों का सम्मान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संविधान दिवस समारोह में किया गया, जहाँ एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह ने उनका स्वागत किया। वे 24 नवंबर को हुए सीजेआई सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में भी मौजूद रहे थे।
इस अभूतपूर्व न्यायिक संगम ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और न्यायिक भाईचारे की नई मिसाल कायम की है।