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भारत

सह-आरोपी को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब मिलीभगत साबित न हो: हाईकोर्ट

NTN REPORT // नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के तहत दायर आपराधिक अपील पर विचार करते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट ने दोहराया कि सह-आरोपी को केवल संदेह और या धारणा के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब मिलीभगत साबित न हो।

इस मामले मेंदोनों आरोपी (A1 और A2) एक साथ बैंकॉक जा रहे थे। जब एक अज्ञात सूचना पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने उनके चेक-इन सामान की जांच की तो पाया कि उनके बैग का निचला हिस्सा नकली थ और जब उन्हें अलग किया गया तो छिपे हुए डिब्बे में एक काले रंग की पॉलीथीन की थैली थी, जिसमें सफेद क्रिस्टलीय पाउडर था। पूछताछ करने पर आरोपी ने खुलासा किया कि वह पदार्थ केटामाइन था।

जस्टिस के. सुरेंदर ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मुख्य रूप से इस तथ्य पर भरोसा किया कि दोनों आरोपी (A1 और A2) एक साथ यात्रा कर रहे थे और NDPS Act की धारा 67 के तहत उनके बयान पर भी।

पीठ ने कहा : “अधिनियम की धारा 67 के तहत एक आरोपी का बयान अस्वीकार्य है। संदेह या धारणा A2 को दोषी ठहराने का आधार नहीं बन सकती, जब अभियोजन पक्ष द्वारा A2 की मिलीभगत को उचित संदेह से परे साबित नहीं किया जाता। तदनुसार, संदेह का लाभ A2 को दिया जाता है। हालांकि A1 की दोषसिद्धि की पुष्टि की जाती है।”

दोनों पर क्रमशः NDPS Act की धारा 23(सी) R/W 28 और 29 (1) और धारा 23(3) R/W 29(1) के तहत मामला दर्ज किया गया। A1 और A2 की ओर से वकील ने तर्क दिया कि NDPS Act की धारा 52 ए के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि हाईकोर्ट ने इस आधार को खारिज कर दिया और कहा कि इस तरह का बचाव देरी से नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा : “अपीलकर्ताओं के वकील का तर्क कि अधिनियम की धारा 52-ए का पालन नहीं किया गया। अपील के चरण में विचार नहीं किया जा सकता, जब परीक्षण के दौरान ऐसा कोई बचाव नहीं किया गया। भारत आंबले के मामले (सुप्रा) में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद और तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अधिनियम की धारा 52-ए के उल्लंघन के बारे में वकील द्वारा उठाए गए आधार को खारिज किया जाता है।”

इसके अलावा उन्होंने नोटिस किया कि यह A1 था, जिसने सामान की जांच की। हालांकि सीमा शुल्क ने तर्क दिया कि A2 के कपड़े सामान में पाए गए। बैग पर न्यायालय ने कहा कि केवल इसलिए कि A1 और A2 एक साथ यात्रा कर रहे थे, यह नहीं कहा जा सकता कि A2 को अवैध कृत्य के बारे में जानकारी थी।

न्यायालय ने कहा : “A2 ने A1 के साथ यात्रा की थी यह स्वीकार करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है कि अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि A2 को सूटकेस के निचले हिस्से में छिपाए गए ड्रग के बारे में जानकारी थी। अभियोजन पक्ष द्वारा कोई सबूत पेश नहीं किया गया या कोई जांच नहीं की गई कि ड्रग को कहां छिपाया गया और क्या A2 को ड्रग के बारे में जानकारी थी। सूटकेस में ड्रग को A2 की उपस्थिति में या उसके ज्ञान में छिपाए जाने को साबित करने वाले किसी भी सबूत के अभाव में A1 के सूटकेस में छिपाए गए ड्रग के बारे में A2 को जानकारी देने का सवाल ही नहीं उठता।” इस प्रकार, A2 को बरी कर दिया गया। A1 द्वारा दायर अपील खारिज कर दी गई।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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