TMC में बड़ी बगावत: 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ, स्पीकर ने माना असली तृणमूल कांग्रेस
NTN REPORT// कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव में हार के महज 30 दिन बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) गंभीर आंतरिक संकट में फंस गई है। पार्टी के 80 विधायकों में से करीब 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े हो गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी है, जिससे ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को बड़ा झटका माना जा रहा है।

स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को दी नेता प्रतिपक्ष की मान्यता
ममता बनर्जी ने विधानसभा में विपक्ष का नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को घोषित किया था, लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों ने इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में लगभग 60 विधायक विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मिले और खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक विधायी दल बताया।
विधायकों के दावे पर विचार करने के बाद स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। साथ ही उन्हें नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय की चाबी भी सौंप दी गई।
चार उपनेता प्रतिपक्ष और नए मुख्य सचेतक की घोषणा
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने विधानसभा में नई जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया है।
उपनेता प्रतिपक्ष के रूप में:
- जावेद अहमद खान
- शबीना यास्मीन
- शीलू साह
- संदीपन साह
को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं अखरूजमा को विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाया गया है।
जिनको ममता ने निलंबित किया, वही बने बगावत के चेहरे
चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साह को निलंबित कर दिया था। लेकिन यही फैसला बाद में पार्टी के भीतर बड़े विद्रोह का कारण बन गया।
निलंबन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने असंतुष्ट विधायकों को अपने साथ जोड़ना शुरू किया और देखते ही देखते दो-तिहाई से अधिक विधायक उनके समर्थन में आ गए।
नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद क्या बोले ऋतब्रत?
नेता प्रतिपक्ष घोषित होने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका उद्देश्य पार्टी को बचाना है, न कि उसे तोड़ना।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी आज भी उनकी नेता हैं और वे चाहते हैं कि वह पार्टी की “मुख्य सलाहकार” के रूप में मार्गदर्शन करती रहें।
ऋतब्रत ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि व्यक्तिवाद के खिलाफ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष के रूप में वे सरकार का रचनात्मक विरोध करेंगे और अच्छे कार्यों की सराहना भी करेंगे।
अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना
ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि अभिषेक विधानसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन संबंधी पत्राचार करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
दरअसल, मई महीने में अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और अन्य नेताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्त करने की जानकारी दी थी, लेकिन स्पीकर ने इसे मान्यता नहीं दी।
30 दिन में कैसे बिखर गई TMC?
4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा को 207 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों तक सिमट गई थी।
चुनाव हारने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा। कई नेताओं ने हार के लिए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया।
असंतुष्ट नेताओं ने संगठन में परिवारवाद, भ्रष्टाचार, एकतरफा फैसले और संगठनात्मक कमजोरियों जैसे मुद्दे उठाए। यही असंतोष धीरे-धीरे खुले विद्रोह में बदल गया।
कानूनी रूप से कितना मजबूत है ऋतब्रत गुट?
विधानसभा में टीएमसी के कुल 80 विधायक हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी भी वैध विभाजन के लिए दो-तिहाई विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।
80 विधायकों का दो-तिहाई आंकड़ा 53 होता है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी को 58 से 60 विधायकों का समर्थन प्राप्त होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में उनका पक्ष कानूनी रूप से मजबूत माना जा रहा है।
फिरहाद हकीम ने छोड़ा कोलकाता मेयर पद
इस राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी फिरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है।
बताया गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक कार्यों में आ रही कठिनाइयों के कारण उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जताई थी, जिसे ममता बनर्जी ने स्वीकार कर लिया।
उनका इस्तीफा भी पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची ED
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम बुधवार को अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पहुंची।
सूत्रों के अनुसार, कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए एजेंसी उन्हें समन देने पहुंची थी। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
TMC के सामने अस्तित्व का संकट
विधानसभा चुनाव में हार, वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे, विधायकों की बगावत और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जैसे घटनाक्रमों ने तृणमूल कांग्रेस को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। स्पीकर द्वारा ऋतब्रत बनर्जी गुट को मान्यता मिलने के बाद अब यह लड़ाई केवल नेता प्रतिपक्ष के पद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पार्टी के वास्तविक नेतृत्व और भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।