AAP में बड़ी टूट: राघव चड्ढा समेत 3 राज्यसभा सांसद BJP में शामिल, दल-बदल कानून पर घमासान
नई दिल्ली/चंडीगढ़ राजनीतिक घटनाक्रम ने बढ़ाया सियासी तापमान
NTN NEWS REPORT// देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके तीन प्रमुख राज्यसभा सांसद —राघव चड्डा,संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने AAP के अंदरूनी संकट को उजागर कर दिया है और सियासी माहौल गरमा गया है।

दो हफ्तों में कैसे बढ़ा विवाद? अंदरखाने चल रही थी खींचतान
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर असंतोष पिछले कुछ समय से बढ़ रहा था।
- 2 अप्रैल को AAP नेतृत्व ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से राघव चड्ढा को हटाने की पहल की।
- इसके बाद नेतृत्व को लेकर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे।
- प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई और सुरक्षा में बदलाव जैसे घटनाक्रमों ने भी राजनीतिक संकेत दिए।
इन घटनाओं ने मिलकर पार्टी के भीतर दरार को गहरा कर दिया, जो अंततः बगावत में बदल गई।
एक दिन में तेजी से बदला सियासी समीकरण
शुक्रवार को घटनाक्रम बेहद तेजी से बदला—
- दोपहर तक पार्टी को संभावित टूट की भनक लग गई।
- वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल AAP के सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।
- दोपहर बाद तीनों सांसदों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर BJP में जाने का ऐलान कर दिया।
- शाम तक औपचारिक रूप से पार्टी जॉइन भी कर ली गई।
AAP ने इसे “ऑपरेशन लोटस” बताते हुए कड़ा विरोध जताया और नेताओं को “गद्दार” तक कहा।

सिर्फ 3 सामने, बाकी 4 पर सस्पेंस
बगावत का दावा सिर्फ तीन सांसदों तक सीमित नहीं है।
राघव चड्ढा ने दावा किया है कि कुल 7 सांसद उनके साथ हैं, जिनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी, रजिंदर गुप्ता,के नाम भी शामिल हैं।
हालांकि, इनमें से कई सांसद सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होते नजर नहीं आए हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सस्पेंस बना हुआ है।
दल-बदल कानून: बचेगी सदस्यता या जाएगी कुर्सी?
मामले का सबसे अहम पहलू अब कानूनी है।
भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के अनुसार—
- अगर कोई सांसद पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है।
- लेकिन यदि दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसे “विलय” माना जाता है और अयोग्यता से बचाव मिल सकता है।
AAP के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं, ऐसे में कम से कम 7 का एक साथ जाना जरूरी है।
👉 वर्तमान स्थिति में:
- सिर्फ 3 सांसद खुलकर सामने आए हैं
- बाकी 4 की स्थिति स्पष्ट नहीं
यही “नंबर गेम” तय करेगा कि यह मामला दल-बदल माना जाएगा या वैध विलय।
कानूनी विशेषज्ञों की अलग-अलग राय
इस मामले पर संवैधानिक विशेषज्ञों की राय भी बंटी हुई है—
- कुछ का मानना है कि केवल राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों का समर्थन पर्याप्त हो सकता है।
- वहीं दूसरी राय यह है कि “मूल राजनीतिक पार्टी” का विलय जरूरी है, सिर्फ विधायी दल का नहीं।
अंततः फैसला राज्यसभा के सभापति के विवेक और संभावित न्यायिक समीक्षा पर निर्भर करेगा।
AAP की रणनीति: अयोग्यता की तैयारी
AAP अब इन तीनों सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
- पार्टी राज्यसभा सभापति को पत्र भेजेगी
- अयोग्यता की मांग करेगी
- साथ ही अन्य सांसदों के दावों की सत्यता पर भी सवाल उठाएगी
राजनीतिक असर: AAP के लिए बड़ा झटका
इस घटनाक्रम को AAP के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
- राज्यसभा में संख्या बल पर असर
- पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल
- विपक्षी राजनीति में नई हलचल
आने वाले दिनों में यह मामला न सिर्फ संसद बल्कि अदालतों तक भी पहुंच सकता है, जहां से इसका अंतिम राजनीतिक और कानूनी भविष्य तय होगा।