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राज्य/शहर

दो पैन कार्ड मामले में आजम खान–अब्दुल्ला को बड़ा झटका: सत्र अदालत ने अपील खारिज की, 7-7 साल की सजा बरकरार

NTN NEWS REPORT//रामपुर (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। रामपुर की सत्र अदालत ने सजा के खिलाफ दाखिल उनकी अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई 7-7 साल की सजा और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने का फैसला यथावत बना रहेगा। दोनों फिलहाल रामपुर जिला जेल में बंद हैं।

फाइल फोटो

क्या है पूरा मामला?

यह प्रकरण वर्ष 2019 में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई 2019 को कोतवाली सिविल लाइंस में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए।

शिकायत के अनुसार—

  • एक पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी
  • दूसरे पैन कार्ड में जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई गई

जांच के दौरान इस पूरे प्रकरण में आजम खान की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया।


एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला

लंबी सुनवाई के बाद रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 17 नवंबर 2025 को दोनों को दोषी करार दिया। अदालत ने:

  • 7-7 साल की सजा
  • 50-50 हजार रुपये का जुर्माना

सुनाया। फैसले के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।


सत्र अदालत से भी नहीं मिली राहत

एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए बचाव पक्ष ने सत्र अदालत में अपील दायर की।
6 अप्रैल 2026 को बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और 20 अप्रैल की तारीख तय की थी।

अब सत्र अदालत ने अपील खारिज कर दी है, जिससे सजा बरकरार रहेगी।


जमानत और दोबारा जेल

आजम खान को सितंबर 2025 में एक मामले में जमानत मिलने के बाद रिहाई मिली थी, लेकिन करीब दो महीने बाद नए अदालती फैसले के चलते उन्हें फिर जेल जाना पड़ा। वर्तमान में पिता-पुत्र दोनों रामपुर जिला जेल में निरुद्ध हैं।


सजा बढ़ाने की मांग पर अलग सुनवाई

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। पूर्व मंत्री काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दायर की थी।

  • सेशन कोर्ट ने पहले सजा बढ़ाने की अपील खारिज कर दी थी।
  • इसके बाद जनवरी 2026 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
  • हाईकोर्ट के निर्देश पर अब सजा बढ़ाने की मांग पर भी सुनवाई जारी है।

राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह मामला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें चुनावी शपथपत्र, दस्तावेजों की वैधता और सार्वजनिक पद के लिए पात्रता जैसे गंभीर प्रश्न जुड़े हैं। अदालत के ताजा फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

अब आगे की कानूनी रणनीति को लेकर बचाव पक्ष की नजर हाईकोर्ट पर टिकी है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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