बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच सरकार सख्त, बैंकों-बीमा कंपनियों को खर्च घटाने के निर्देश!
NTN REPORT// नई दिल्ली। देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बीते सप्ताह हुई बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए खर्च नियंत्रण के सख्त निर्देश जारी किए हैं। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को लागत कम करने के लिए कई उपाय तुरंत लागू करने को कहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने यह कदम बढ़ती वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उठाया है। आदेश का असर भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत कई सरकारी वित्तीय संस्थानों पर पड़ेगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि बैठकों, परियोजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए अधिकतम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग किया जाए। केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही अधिकारियों की शारीरिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा चेयरमैन, प्रबंध निदेशक (MD), CEO और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की विदेश यात्राओं में भी कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार चाहती है कि जहां संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों और बैठकों में वर्चुअल माध्यम से भागीदारी की जाए।
इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ाने पर जोर
वित्त मंत्रालय ने सरकारी संस्थानों को पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों की निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने की सलाह दी है। आदेश में कहा गया है कि मुख्यालय और शाखाओं के लिए किराए पर लगाए गए पारंपरिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाए।
सरकार का मानना है कि इससे ईंधन खर्च में कमी आने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद उठाया गया कदम
यह फैसला प्रधानमंत्री की हालिया अपील के बाद लिया गया है। प्रधानमंत्री ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का हवाला देते हुए देशवासियों और सरकारी संस्थानों से ईंधन बचत के लिए विशेष कदम उठाने को कहा था।
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे उपायों को फिर से लागू करने की सलाह दी थी। पीएम मोदी ने इसे “राष्ट्रीय हित” से जुड़ा कदम बताते हुए कहा था कि तेल की बढ़ती कीमतें भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव बना रही हैं।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी भारत की चिंता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास की अस्थिरता ने तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब ऊर्जा बचत और खर्च नियंत्रण को लेकर बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है।
आम नागरिकों से भी की गई थी बचत की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करने की अपील की थी।
इसके अलावा उन्होंने मध्यम वर्ग से कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्राओं से बचने, सोने की खरीद सीमित करने और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
आर्थिक मोर्चे पर सतर्कता बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के ये कदम संकेत देते हैं कि वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता को लेकर केंद्र गंभीर है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में और भी सख्त आर्थिक और ऊर्जा बचत उपाय देखने को मिल सकते हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।