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भारत

कितने दिनों के बाद उतार देना चाहिए कलाई में बंधा कलावा…

NTN NEWS REPORT// रक्षासूत्र या कलावा को हिंदू धर्म में सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है. मान्यता है कि, इसे कलाई में बांधने से सकारात्मकता बनी रहती है. वैदिक परंपरा में कलावा पहनने और उतारने के नियम भी बताए गए हैं।

कलावा उतारने के नियम :-

– हिंदू धर्म में लाल और पीले रंग के कलावा, रक्षासूत्र या मौली का प्रयोग पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान आदि के दौरान किया जाता है. भारतीय संस्कृति में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. पूजा के दौरान इसे हाथ में बांधना भी शुभ माना जाता है।

– कलावा का लाल और पीले रंग का संबंध ज्योतिष में मंगल और गुरु से बताया गया है. कलावा का लाल रंग ऊर्जा और समृद्धि को बढ़ाता है. वहीं पीला रंग रक्षा करता है और उन्नति में सहायक होता है।

– कलावा बांधने और उतारने के कुछ नियम भी हैं. जैसे कलावा बांधने के कितने दिन बाद इसे उतारना चाहिए. कलावा उतारने के बाद क्या करना चाहिए. नियमों का पालन न करने पर कलावा के शुभता का प्रभाव कम हो सकता है।

– शास्त्री श्री रामजी त्रिपाठी के मुताबिक, कलावा का सकारात्मक प्रभाव 21 दिनों के बाद समाप्त हो जाता है. इसलिए कलावा को 21 दिन बाद कलाई से उतार देना चाहिए और फिर किसी शुभ मुहूर्त में दोबारा से आप नया कलावा कलाई पर बांध सकते हैं।

– कई लोग महीनों तक कलाई में कलावा बांधे रहते हैं या फिर पुराने कलावा के ऊपर ही नया कलावा बांध लेते हैं, जोकि उचित नहीं है. 21 दिनों से अधिक समय तक कलावा हाथ में बंधे रहने पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है।

– कलावा कच्चे सूत का बना होता है और बड़ी आसानी से प्रकृति में मिल जाता है. इसलिए 21 दिन बाद कलाई से कलावा उताकर किसी अशुद्ध स्थान पर फेंकने के बजाय आप इसे गमले की मिट्टी में दबा दें।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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