
ब्लैक फिल्म वाले चार पहिया वाहन पर शिकंजा थाना जांजगीर पुलिस की त्वरित कार्यवाही, क्या अब अवैध रूप से नीली बत्ती लगी गाड़ियों और नेताओं की गाड़ियों में लगे हूटर और बत्तियों को निकालते हुए कार्यवाही होगी ?
जांजगीर चाम्पा 03 अप्रैल 2025 // आज जांजगीर पुलिस के द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जांजगीर चांपा विवेक शुक्ला (IPS) के निर्देशन में जिला पुलिस जांजगीर चांपा द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए यातायात नियमों का उलंघन करने वाले वाहन चालकों के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की गई।
इसी क्रम में निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी थाना प्रभारी जांजगीर द्वारा जांजगीर क्षेत्र में वाहन चेकिंग किया गया। चेकिंग के दौरान थार वाहन में ब्लैक फिल्म लगे हुए पाए जाने से वाहन चालक के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए 2800/₹ का समन चार्ज किया गया।
जांजगीर चाम्पा जिले में कई अधिकारी और नेता अवैध रूप से कर रहे नीली बत्ती,फ्लैशर लाइट, पीली बत्ती और हूटर लगी गाड़ियों का उपयोग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनते ही वीआईपी कल्चर को समाप्त करते हुए किसी भी प्रकार की बत्तियों के प्रयोग को बंद करते हुए आदेश जारी किए गए थे। स्वयं प्रधानमंत्री के द्वारा नियमों का पालन करते हुए किसी भी प्रकार से बत्ती लगी गाड़ियों का उपयोग नहीं किया जाता। अभी हाल ही में जांजगीर चाम्पा जिले के दौरे पर आए राज्यपाल जो कि पूरे राज्य के संवैधानिक प्रमुख है किसी भी प्रकार की बत्ती लगी गाड़ियों का प्रयोग नहीं करते हुए नियमों का पालन करते दिखे। ठीक इसके उलट जांजगीर चाम्पा जिले के अधिकारी हो चाहे नेता हो इनका मोह नीली पीली लाल या फ्लैशर लाइट लगी गाड़ियों से हूटर से छुटने का नाम ही नहीं ले रहा है। शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लगातार नीली पीली बत्ती फ्लैशर लाइट एवं हूटर का प्रयोग करते देखे जा सकते है। इन अधिकारियों और नेताओं से आम जन मानस सिख लेता है नियमों के पालन को सीखता है इन्हीं अधिकारियों के ऊपर नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी होती है और ये नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। ऐसे अधिकारी नेता वीआईपी कल्चर को छोड़ ही नहीं पा रहे है।



अब जब जांजगीर पुलिस के द्वारा मुहिम छेड़ी गई है तो शायद इन जिद्दी अधिकारियों को जो नीली बत्ती लगी गाड़ियों का मोह नहीं छोड़ते हुए लगातार नियमों को धज्जियां उड़ाते दिख रहे है शायद अब लगाम लग जाए। ऐसा भी नहीं है कि अवैध रूप से नीली बत्ती लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे अधिकारियों के विरुद्ध पत्र जारी नहीं हो रहे है शासन स्तर से परिवहन विभाग द्वारा अभी हाल ही में कड़ा पत्र जारी भी हुआ है और पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की बात भी कही है है फिर भी ना जाने किस बात का गुरूर है जो नीली पीली लाल फ्लैशर लाइट लगी गाड़ियों और हूटर का मोह छुटने का नाम ही नहीं ले रहा है।
जिस प्रकार से जिले की पुलिसिंग में कसावट आई है पुलिस कप्तान के द्वारा लगातार नियमों का पालन करने हेतु दिशा निर्देश जारी किए जा रहे है उसी क्रम में ऐसे बेलगाम अधिकारियों, नेताओं में भी कसावट लाने की जरूरत है जो अवैध रूप से नीली बत्ती, फ्लैशर लाइट लगी, पीली बत्ती लगी एवं हूटर लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं।

एक मई 2017 को भारत में लाल और नीली बत्ती का कल्चर कर दिया गया है खत्म : नियमों के अनुसार, सिर्फ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी सेवाओं में तैनात गाड़ियों पर ही लाल बत्ती लगाई जा सकती है. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इनकी इमरजेंसी सेवा के रूप में पहचान बनी रहे, और जब ये गुजरें तो लोग इन्हें दूर से पहचानकर रास्ता दें. इसके लिए केंद्र सरकार ने बकायदा मोटर वाहन एक्ट 1989 में बदलाव किया था. कानून के नियम 108(1) (3) में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें तय करेंगी कि कौन से वाहनों पर लाल और नीली बत्ती लगाई जा सकेगी. तब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि लाल बत्ती पूरी तरह बैन रहेगी, मगर नीली बत्ती इमरजेन्सी वाहनों पर लगेगी।