
आरोपी पर दबाव बनाने के लिए भाई को 4 दिन थाने में रखा, हाईकोर्ट सख्त: ₹40 हजार मुआवजा देने का आदेश; जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से होगी वसूली
NTN REPORT// प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने या उस पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उसके परिवार के निर्दोष सदस्य को हिरासत में रखना गैरकानूनी है। अदालत ने ऐसे ही एक मामले में अरविंद कुमार यादव को करीब चार दिन तक अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में ₹40,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवजे की राशि संबंधित जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूल की जाए।
भाई के खिलाफ दर्ज था मामला, पुलिस ने अरविंद को घर से उठाया
मामला प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाना क्षेत्र का है। अरविंद कुमार यादव के भाई सुरेश कुमार के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज थी। शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था और जांच के दौरान धारा 109 यानी हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ी गई।
अरविंद कुमार यादव का कहना था कि उनका इस आपराधिक मामले से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद पुलिस उन्हें 23 जून 2026 को जौनपुर स्थित उनके घर से उठाकर जॉर्ज टाउन थाने ले गई। याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्हें करीब 26 जून की शाम 7 बजे छोड़ा गया। रिहाई के समय तैयार किए गए सुपुर्दगीनामा को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जांच अधिकारी ने माना- SHO के निर्देश पर थाने लाया गया था
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के निर्देश पर जांच अधिकारी अश्वनी साविता न्यायालय में पेश हुए। उन्होंने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ अरविंद के घर गए थे और उन्हें पूछताछ के लिए थाने लाया गया था।
राज्य सरकार की ओर से भी इस तथ्य का विवाद नहीं किया गया कि अरविंद 26 जून की शाम तक थाने में मौजूद थे।
सीडीआर और सीसीटीवी ने खोली हिरासत की पूरी तस्वीर
अदालत ने अरविंद की मौजूदगी की पुष्टि के लिए उनके मोबाइल का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी देखा। रिकॉर्ड के अनुसार, 23 जून को उनकी मोबाइल लोकेशन जौनपुर के बदलापुर से प्रयागराज की ओर गई और सुबह करीब 7:56 बजे जॉर्ज टाउन क्षेत्र में दिखाई दी।
इसके बाद उनका मोबाइल करीब 12:11 बजे बंद हो गया और 27 जून की सुबह करीब 8:08 बजे जौनपुर में दोबारा चालू हुआ।
अदालत ने जॉर्ज टाउन थाने की सीसीटीवी फुटेज भी देखी। फुटेज से 23 से 25 जून तक अरविंद की थाने में मौजूदगी की पुष्टि हुई। हालांकि 26 जून की सीसीटीवी फुटेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। इन परिस्थितियों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि अरविंद को कम से कम चार दिनों तक गैरकानूनी हिरासत में रखा गया।
आरोपी भाई पर दबाव बनाने के लिए हिरासत में रखने की बात
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि अरविंद को स्वयं किसी अपराध में शामिल होने के कारण नहीं, बल्कि उनके भाई सुरेश कुमार पर दबाव बनाने और उसे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से थाने में रखा गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का किसी अपराध से संबंध नहीं होने के बावजूद उसे उसके परिवार के आरोपी सदस्य पर दबाव बनाने के लिए हिरासत में रखना व्यक्ति की स्वतंत्रता का गैरकानूनी हनन है।
‘निर्दोष परिवार के सदस्य को हिरासत में नहीं रख सकती पुलिस’
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी ऐसे निर्दोष व्यक्ति को, जिसका कथित अपराध से कोई संबंध नहीं है, उसके परिवार के वास्तविक आरोपी पर दबाव बनाने अथवा उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं रख सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी गैरकानूनी हिरासत चाहे कितने ही कम समय के लिए क्यों न हो, इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता का अनुचित हनन होता है और पीड़ित व्यक्ति मुआवजे का हकदार है।
पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूली जाएगी ₹40 हजार की राशि
हाईकोर्ट ने अरविंद कुमार यादव को ₹40,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यह राशि उन पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूल की जाए, जो उनकी गैरकानूनी हिरासत के लिए जिम्मेदार थे। किस पुलिसकर्मी से कितनी राशि वसूल की जाएगी, इसका अनुपात राज्य सरकार तय करेगी।
दो पुलिस अधिकारियों की सेवा पुस्तिका में दर्ज होगी अदालत की नाराजगी
अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार सिंह और जांच अधिकारी अश्वनी साविता के आचरण पर भी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि दोनों अधिकारियों के सेवा अभिलेख में अदालत की नाराजगी दर्ज की जाए।
मामले में अरविंद के भाई सुरेश कुमार को बाद में अगस्त 2026 में अग्रिम जमानत भी मिल गई। हाईकोर्ट ने मुआवजे और अन्य निर्देश जारी करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।