ऋण चुकाने के बाद भी जमीन के मूल दस्तावेज नहीं लौटाए, बैंक को 63.90 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर-चांपा का बड़ा फैसला, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में भी देने होंगे 5 हजार रुपये
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा ने ऋण चुकता होने के बाद भी बंधक रखी जमीन के मूल दस्तावेज वापस नहीं करने के मामले में भारतीय स्टेट बैंक की जांजगीर शाखा के विरुद्ध आदेश पारित किया है। आयोग ने बैंक को उपभोक्ता के जमीन के मूल दस्तावेज वापस करने के साथ 63 लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।

आयोग ने आदेश में कहा है कि निर्धारित अवधि में आदेशित राशि का भुगतान नहीं करने पर आदेश दिनांक से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मशीनरी खरीदने के लिए लिया था 33.94 लाख रुपये का ऋण
मामला ग्राम सरखों निवासी मैसर्स साहू लेयर हाउस की प्रोपराइटर राजेश्वरी साहू से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने भारतीय स्टेट बैंक की स्टेशन रोड स्थित जांजगीर शाखा से मशीनरी खरीदने के लिए 33 लाख 94 हजार रुपये का ऋण लिया था। ऋण के लिए उनकी जमीन को बैंक के पास बंधक रखा गया था।
शिकायत के अनुसार, समझौते के तहत उपभोक्ता ने 31 मार्च 2022 तक ऋण की पूरी राशि चुका दी थी। इसके बावजूद बैंक ने ऋण खाता बंद नहीं किया और बंधक रखी गई जमीन के मूल दस्तावेज भी वापस नहीं किए।
कैंसर के इलाज के लिए जमीन बेचने की जरूरत, दस्तावेज बैंक के पास होने से आई परेशानी
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें कैंसर बीमारी के इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता थी। इलाज के लिए धन की व्यवस्था करने के उद्देश्य से वह अपनी जमीन बेचना चाहती थीं, लेकिन जमीन के मूल दस्तावेज बैंक के पास होने के कारण जमीन के विक्रय में परेशानी उत्पन्न हो रही थी।
शिकायतकर्ता द्वारा बैंक से मूल दस्तावेज वापस करने की मांग की गई, लेकिन दस्तावेज वापस नहीं किए गए। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर मूल दस्तावेज वापस दिलाने के साथ क्षतिपूर्ति की मांग की।
आयोग ने दस्तावेज और दोनों पक्षों के तर्कों का किया अवलोकन
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्रों, दस्तावेजों और तर्कों का सावधानीपूर्वक अवलोकन किया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ऋण की राशि पूरी तरह चुकता होने के बाद बंधक रखी संपत्ति के मूल दस्तावेज निर्धारित अवधि में वापस किया जाना आवश्यक है।
आयोग के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा 31 मार्च 2022 तक समझौते के अनुसार ऋण राशि का भुगतान कर दिया गया था, इसके बावजूद बैंक द्वारा जमीन के मूल दस्तावेज वापस नहीं किए गए।
बैंक की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना
आयोग ने पाया कि बैंक द्वारा बिना उचित कारण बंधक रखी जमीन के मूल दस्तावेज वापस नहीं करना सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग ने संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋण की राशि चुकता होने के बाद बंधक संपत्ति के दस्तावेज निर्धारित समयावधि में वापस किए जाने चाहिए। दस्तावेज वापस नहीं करने की स्थिति में बैंक पर प्रतिदिन के आधार पर क्षतिपूर्ति का दायित्व बनता है।
बैंक को 45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी एवं सदस्य महिमा सिंह ने मामले में आदेश पारित करते हुए बैंक को शिकायतकर्ता को जमीन के मूल दस्तावेज वापस करने तथा 63,90,000 रुपये क्षतिपूर्ति एवं 5,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने बैंक को आदेशित राशि का भुगतान आदेश दिनांक से 45 दिनों के भीतर करने को कहा है। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर आदेश दिनांक से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत पारित हुआ आदेश
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के अंतर्गत प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया है।
इस आदेश के तहत बैंक को एक ओर जहां बंधक रखी जमीन के मूल दस्तावेज वापस करने होंगे, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता को कुल 63 लाख 95 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति एवं मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर आदेशानुसार ब्याज की देनदारी भी बैंक पर होगी।