ईरान ने फिर शुरू किया बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन, भूमिगत ठिकानों में जुटेगा हथियारों का जखीरा; अमेरिका-इजरायल के दावों पर उठे सवाल!
NTN REPORT// तेहरान। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को दोबारा खड़ा करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। अमेरिकी और मध्य-पूर्वी अधिकारियों से मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान भूमिगत ठिकानों में पहले से जमा मिसाइल उपकरणों और कलपुर्जों को जोड़कर सीमित संख्या में नई बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार कर रहा है। इस घटनाक्रम की जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के आधार पर रॉयटर्स ने भी दी है।

हमलों के बाद भी मिसाइल उत्पादन की वापसी
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के मिसाइल अड्डों, उत्पादन केंद्रों और औद्योगिक ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने और उन्हें तैनात करने की क्षमता को कमजोर करना था।
अमेरिकी अधिकारियों ने भी अभियान के दौरान ईरान के मिसाइल और ड्रोन औद्योगिक आधार को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने का दावा किया था। कुछ अमेरिकी आकलनों में ईरान के ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइल और नौसैनिक औद्योगिक ढांचे को हुए नुकसान को 90 प्रतिशत तक बताया गया था।
लेकिन अब सामने आई खुफिया जानकारी संकेत देती है कि ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। भूमिगत सुविधाओं में पहले से मौजूद कलपुर्जों का इस्तेमाल कर उत्पादन और संयोजन का काम दोबारा शुरू किया गया है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार उत्पादन अभी युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में काफी सीमित है।
भूमिगत ठिकानों में तैयार हो रही हैं मिसाइलें
खुफिया जानकारी के अनुसार ईरान की गतिविधियां कई भूमिगत स्थानों पर देखी गई हैं। इनमें तेहरान के दक्षिण-पूर्व में स्थित खोजिर मिसाइल परिसर भी शामिल है।
ईरान कथित तौर पर भविष्य में हवाई हमलों से बचने के लिए नए भूमिगत उत्पादन और संयोजन केंद्र तैयार करने की कोशिश भी कर रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य मिसाइल निर्माण के महत्वपूर्ण हिस्सों को सतह के ऊपर स्थित औद्योगिक केंद्रों से दूर रखना है, ताकि किसी नए हवाई अभियान की स्थिति में उत्पादन पूरी तरह बाधित न हो।
पहले से जमा कलपुर्जे बने ईरान की ताकत
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान द्वारा युद्ध से पहले किए गए भंडारण को माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने पहले से ही मिसाइलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्से जमा कर रखे थे। इनमें मिसाइल के ढांचे, वारहेड और मार्गदर्शन एवं नियंत्रण प्रणाली जैसे घटक शामिल बताए गए हैं।
युद्ध के दौरान तैयार मिसाइलों का इस्तेमाल होने के बावजूद इन स्टॉक किए गए हिस्सों की मदद से ईरान अब सीमित स्तर पर नई मिसाइलें तैयार कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन की वास्तविक क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान के पास ऐसे कलपुर्जों का कितना भंडार बचा है और कितनी भूमिगत सुविधाएं काम कर रही हैं।
दो तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम
खुफिया जानकारी के अनुसार ईरान भूमिगत ठिकानों में तरल ईंधन और ठोस ईंधन वाली दोनों तरह की बैलिस्टिक मिसाइलों के संयोजन पर काम कर रहा है।
तरल ईंधन वाली मिसाइलें
इन मिसाइलों को प्रक्षेपण से पहले ईंधन भरने की आवश्यकता होती है। इसलिए इन्हें तुरंत प्रक्षेपित करने के लिए तैयार रखना अपेक्षाकृत कठिन होता है।
ठोस ईंधन वाली मिसाइलें
ठोस ईंधन वाली मिसाइलों को पहले से तैयार स्थिति में रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इन्हें अपेक्षाकृत कम तैयारी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से इनकी तैनाती और भंडारण क्षमता को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञ विशेष चिंता जताते हैं।
अमेरिका और इजरायल के दावों पर क्यों उठ रहे सवाल?
ईरान के दोबारा मिसाइल उत्पादन शुरू करने की खबर ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान ईरान की मिसाइल क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर करने को अपनी बड़ी सैन्य उपलब्धि बताया था।
अब भूमिगत ठिकानों में उत्पादन गतिविधियां सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान की मिसाइल क्षमता को वास्तव में उतना नुकसान पहुंचा था जितना शुरुआती दावों में बताया गया था।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ईरान की पूरी पुरानी क्षमता बहाल हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्पादन अभी सीमित स्तर पर हो रहा है और युद्ध के दौरान उसके औद्योगिक ढांचे तथा तैयार मिसाइल भंडार को काफी नुकसान पहुंचा है।
ईरान की रणनीति: उत्पादन को फैलाना और छिपाना
ईरान लंबे समय से अपनी संवेदनशील सैन्य सुविधाओं को भूमिगत रखने की रणनीति अपनाता रहा है। सुरंगों और भूमिगत परिसरों के जरिए वह महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को हवाई हमलों से बचाने की कोशिश करता है।
मौजूदा घटनाक्रम में भी यही रणनीति दिखाई दे रही है। उत्पादन क्षमता को एक बड़े कारखाने तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग भूमिगत स्थानों पर गतिविधियां संचालित करने से किसी एक हमले के कारण पूरे नेटवर्क के ठप होने का खतरा कम हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान नए भूमिगत संयोजन केंद्र बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
अमेरिका और सहयोगियों के लिए नई चुनौती
ईरान की मिसाइल क्षमता का धीरे-धीरे वापस आना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चुनौती बन सकता है। खासकर तब, जब क्षेत्र में पहले से ही सैन्य तनाव काफी ऊंचा है।
यदि ईरान भूमिगत सुविधाओं के जरिए मिसाइलों का उत्पादन लगातार बढ़ाने में सफल होता है तो भविष्य में केवल हवाई हमलों के जरिए उसकी मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना और मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका और इजरायल के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ ईरान की भूमिगत सैन्य सुविधाओं पर नजर रखना और दूसरी तरफ उसके मिसाइल कार्यक्रम की पुनर्बहाली को रोकना।
मध्य-पूर्व की सुरक्षा पर बढ़ सकता है दबाव
ईरान की मिसाइल क्षमता में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का असर केवल ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव इजरायल और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के पास फिर से बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें उपलब्ध होना क्षेत्रीय देशों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंता बन सकता है।
साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपनी वायु एवं मिसाइल रक्षा व्यवस्था पर अधिक संसाधन खर्च करने पड़ सकते हैं।
पूरी क्षमता की वापसी अभी नहीं, लेकिन खतरा बरकरार
विशेषज्ञों और अधिकारियों के आकलन से फिलहाल यह संकेत मिलता है कि ईरान ने अपनी मिसाइल उत्पादन क्षमता को पूरी तरह पहले के स्तर पर वापस नहीं पहुंचाया है। औद्योगिक ढांचे को हुए नुकसान, कलपुर्जों की उपलब्धता और अन्य आपूर्ति संबंधी बाधाएं उसके सामने चुनौती बनी हुई हैं।
इसके बावजूद भूमिगत सुविधाओं और पहले से जमा कलपुर्जों के सहारे उत्पादन दोबारा शुरू कर पाना इस बात का संकेत है कि ईरान की मिसाइल व्यवस्था अपेक्षा से अधिक लचीली और पुनर्निर्माण योग्य हो सकती है।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान इन भूमिगत सुविधाओं में मिसाइलों का उत्पादन किस गति से बढ़ा पाता है। यदि स्टॉक किए गए कलपुर्जे पर्याप्त मात्रा में हैं और भूमिगत संयोजन केंद्र सक्रिय बने रहते हैं, तो आने वाले समय में उसकी मिसाइल क्षमता में और सुधार हो सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल ईरान की भूमिगत गतिविधियों पर खुफिया निगरानी बढ़ा सकते हैं। सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ प्रतिबंध, कूटनीतिक दबाव और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के प्रयास भी बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता की यह वापसी इस बात का संकेत है कि बड़े पैमाने पर सैन्य हमलों के बावजूद किसी देश की रणनीतिक हथियार क्षमता को पूरी तरह खत्म करना बेहद कठिन हो सकता है। भूमिगत ढांचा और पहले से जमा कलपुर्जे ईरान को अपनी क्षमता दोबारा खड़ी करने में मदद कर रहे हैं। हालांकि उत्पादन अभी सीमित बताया जा रहा है, लेकिन यह घटनाक्रम मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति और अमेरिका-इजरायल की रणनीति के लिए निश्चित रूप से एक नई चुनौती बन गया है।
स्रोत आधार: यह रिपोर्ट 10 सितंबर 2026 को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट और उसके आधार पर सामने आई अमेरिकी एवं मध्य-पूर्वी अधिकारियों की जानकारी पर आधारित है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।