18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज: मोदी बोले—भारत ग्लोबल समाधान का केंद्र, पुतिन ने कहा—दुनिया में ग्रोथ के नए इंजन बन रहा BRICS
NTN REPORT//नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आज से 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज होने जा रहा है। सम्मेलन से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसके साथ ही ब्रिक्स बिजनेस फोरम में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, तकनीक और बदलती विश्व व्यवस्था को लेकर नेताओं ने अपनी बात रखी।

भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।
पीएम मोदी बोले—ब्रिक्स का आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स समूह अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी, तब इसमें केवल चार देश शामिल थे। आज ब्रिक्स और उसके साझेदार देशों को मिलाकर इसका परिवार 21 देशों तक पहुंच चुका है।
मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देश आज दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद और 25 प्रतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस अवधि में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद करीब ढाई गुना बढ़ा है, उसी दौरान ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग साढ़े चार गुना बढ़ी है।
‘ग्लोबल इनोवेशन और समाधान का अहम केंद्र बन रहा BRICS’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देश अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गए हैं, बल्कि वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी उभर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में नवाचार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। इनमें जमीनी स्तर की पहलों से लेकर अत्याधुनिक तकनीक तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, उसकी रफ्तार और उससे जुड़ी उम्मीदें सभी देशों के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।
भारत में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम बताया गया है।
पुतिन का दावा—G7 से आगे निकला BRICS
ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है, जबकि जी7 देशों की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है।
पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया में विकास के नए इंजन के रूप में उभर रहा है। उनके मुताबिक वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के साथ ब्रिक्स देशों की आर्थिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने ब्रिक्स को दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक समूहों में से एक बताया और कहा कि यह समूह ब्रिक्स से बाहर के देशों के साथ भी सहयोग के लिए तैयार है।
पुतिन ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों पर ब्रिक्स को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के पश्चिमी प्रतिस्पर्धी अपनी पुरानी आर्थिक बढ़त हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं और यह प्रतिस्पर्धा सरकारी स्तर पर अनुचित दिशा ले रही है।
पुतिन ने रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने अपना आर्थिक प्रदर्शन बनाए रखा है।
पुतिन ने भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका को सराहा
रूसी राष्ट्रपति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रही है और इस बदलती व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है।
पुतिन के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है और ब्रिक्स इस परिवर्तन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति बोले—दुनिया मुश्किल दौर से गुजर रही
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कठिन दौर से गुजर रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट और राजनीतिक दबाव के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने वैश्विक आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है।
पेजेशकियान ने कहा कि ब्रिक्स की वास्तविक ताकत केवल उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं है। इसकी असली क्षमता तब सामने आएगी, जब इन आर्थिक क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के मजबूत नेटवर्क में बदला जाएगा।
उन्होंने संभावित सहयोग को वास्तविक और प्रभावी सहयोग में बदलने पर जोर दिया।
सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचेंगे। यह करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा होगी।
गलवान घाटी में वर्ष 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच यह पहली आमने-सामने की द्विपक्षीय वार्ता होगी, यदि प्रस्तावित मुलाकात निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है।
हाल ही में दोनों नेताओं ने किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन के दौरान एक मंच साझा किया था। वहां दोनों ने हाथ मिलाया था, लेकिन औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।
शी जिनपिंग इससे पहले वर्ष 2019 में भारत आए थे, जब तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। इससे पहले वह 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए थे। सितंबर 2014 में उन्होंने पहली बार भारत का दौरा किया था।
आज क्या रहेगा कार्यक्रम?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिनभर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे—
- दोपहर 2 बजे: भारत मंडपम के दूसरे स्तर पर नेताओं का आगमन शुरू होगा और आधिकारिक फोटो शूट होगा।
- दोपहर 2:35 बजे: नेताओं की बंद कमरे में बैठक होगी। बैठक का मुख्य विषय समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना रहेगा।
- शाम 4:25 बजे: ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का आयोजन होगा।
- शाम 5:05 बजे: बाहरी लॉन में समूह फोटो का कार्यक्रम होगा।
- शाम 5:10 बजे: संयुक्त पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
- शाम 7:30 बजे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेताओं के सम्मान में गाला डिनर का आयोजन होगा।
पुतिन और पेजेशकियान के साथ मोदी की द्विपक्षीय वार्ता
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी महत्वपूर्ण रहेगी।
इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा, वैश्विक आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और विश्व व्यवस्था में बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।