PoK में 26वें दिन भी उग्र प्रदर्शन जारी: खाने-दवाइयों की कमी का आरोप, भारत से मदद की अपील; 8 जुलाई तक सरकार को अल्टीमेटम
NTN REPORT// रावलकोट,लंदन। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले तीन सप्ताह से इलाके में भोजन और दवाइयों की आपूर्ति बाधित है, जिससे गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ नेता सरदार अमन खान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से भारत और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के इस पार रहने वाले लोगों से मदद की अपील की है।

रावलकोट की जनसभा में भारत से सहायता की अपील
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने कहा कि क्षेत्र के लोग भोजन और आवश्यक दवाइयों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की नीतियों के कारण आम नागरिकों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं और लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है।
एलओसी की ओर मार्च का प्रस्ताव, भीड़ ने दिया समर्थन
सभा के दौरान अमन खान ने उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या उन्हें नियंत्रण रेखा (एलओसी) की ओर मार्च करना चाहिए। इस पर हजारों लोगों की भीड़ ने एक स्वर में समर्थन जताते हुए “उस तरफ बढ़ो” के नारे लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जनता की मांगों का जवाब बल प्रयोग और गोलियों से देती रही, तो आंदोलनकारी अन्य विकल्प अपनाने के लिए भी मजबूर होंगे।
8 जुलाई तक का अल्टीमेटम, आंदोलन के अगले चरण की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पाकिस्तान सरकार और तथाकथित आजाद कश्मीर प्रशासन को 8 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो 8 जुलाई को धरना स्थल से आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी और विरोध प्रदर्शन को और व्यापक बनाया जाएगा।
लंदन में भी गूंजा PoK का मुद्दा
पीओके का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक दमन के विरोध में हजारों कश्मीरी प्रवासियों ने लंदन में आयोजित एक बड़े “मिलियन मार्च” में भाग लिया। इस प्रदर्शन का आयोजन भी जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से किया गया।
मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता की उठी मांग
लंदन में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने और नागरिक अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पीओके की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने और वहां के लोगों के राजनीतिक एवं मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीओके में नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है।
(नोट: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।)