मैक्सिको की ऊंचाई से निपटने के लिए इंग्लैंड का खास प्लान, जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों को वियाग्रा लेने की अनुमति
मैक्सिको सिटी की ऊंचाई बनी सबसे बड़ी चुनौती
NTN REPORT// फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में इंग्लैंड और मेजबान देशों में से एक मैक्सिको के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ फुटबॉल के कारण ही नहीं, बल्कि एक अनोखे मेडिकल फैसले की वजह से भी चर्चा में है। इंग्लैंड की टीम को जरूरत पड़ने पर वियाग्रा (सिल्डेनाफिल) का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। यह फैसला किसी प्रदर्शन बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मैक्सिको सिटी की अधिक ऊंचाई पर खिलाड़ियों को होने वाली शारीरिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

एस्टाडियो एज़्टेका की ऊंचाई से घट जाता है ऑक्सीजन स्तर
इंग्लैंड के मैनेजर थॉमस टुखेल की टीम 4 जुलाई को मैक्सिको सिटी के ऐतिहासिक एस्टाडियो एज़्टेका स्टेडियम में उतरेगी। यह स्टेडियम समुद्र तल से लगभग 2,240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य स्थानों की तुलना में कम होता है, जिससे खिलाड़ियों को जल्दी थकान, सांस लेने में कठिनाई और एल्टीट्यूड से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
वियाग्रा क्यों दी जा रही है?
वियाग्रा (सिल्डेनाफिल) का उपयोग सामान्यतः इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile Dysfunction) के इलाज के लिए किया जाता है। हालांकि, यह दवा रक्त वाहिकाओं को फैलाकर शरीर में रक्त प्रवाह बेहतर बनाने का भी काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इससे शरीर तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर हो सकती है और खिलाड़ियों को एल्टीट्यूड के प्रभाव से कुछ राहत मिल सकती है। इसी कारण इंग्लैंड की टीम ने जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों को इसका उपयोग करने का विकल्प दिया है।
मैक्सिको के घरेलू मैदान पर जीत आसान नहीं
एस्टाडियो एज़्टेका लंबे समय से मैक्सिको की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। मौजूदा विश्व कप में मैक्सिको ने अपने सभी चार मुकाबले इसी मैदान पर जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है। आंकड़ों के अनुसार, इस स्टेडियम पर मैक्सिको ने अब तक 89 मैच खेले हैं, जिनमें उसे केवल दो बार हार का सामना करना पड़ा है। यहां उसकी आखिरी हार वर्ष 2013 में दर्ज हुई थी। ऐसे में इंग्लैंड को मजबूत घरेलू टीम, ऊंचाई और दर्शकों के समर्थन जैसी कई चुनौतियों का एक साथ सामना करना होगा।
राउंड ऑफ-32 में मुश्किल से मिली थी इंग्लैंड को जीत
इंग्लैंड ने राउंड ऑफ-32 में डीआर कांगो को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई थी। हालांकि यह मुकाबला टीम के लिए आसान नहीं रहा। कप्तान हैरी केन ने मैच के अंतिम क्षणों में दो गोल कर इंग्लैंड को हार से बचाया था। इस विश्व कप में कई बड़े उलटफेर देखने को मिले हैं, इसलिए इंग्लैंड किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहेगा।
क्या वियाग्रा का इस्तेमाल एंटी-डोपिंग नियमों के खिलाफ है?
नहीं। विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने सिल्डेनाफिल (वियाग्रा) को प्रतिबंधित दवाओं की सूची में शामिल नहीं किया है। खिलाड़ी प्रतियोगिता के दौरान और उसके बाहर भी इसका उपयोग कर सकते हैं। WADA द्वारा किए गए विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया कि सामान्य परिस्थितियों या समुद्र तल के आसपास इस दवा से प्रदर्शन में कोई अनुचित या महत्वपूर्ण बढ़ोतरी नहीं होती। इसी वजह से यह एंटी-डोपिंग नियमों के तहत वैध दवा मानी जाती है।
मेडिकल जरूरत, प्रदर्शन बढ़ाने का तरीका नहीं
इंग्लैंड टीम का यह फैसला पूरी तरह मेडिकल आधार पर लिया गया है। टीम प्रबंधन का उद्देश्य केवल इतना है कि अधिक ऊंचाई के कारण खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर न पड़े। ऐसे में जरूरत महसूस होने पर खिलाड़ियों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार वियाग्रा का उपयोग करने का विकल्प दिया गया है, ताकि वे बेहतर शारीरिक स्थिति में मैदान पर उतर सकें।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।