776 रन, 72 छक्के और 230+ स्ट्राइक रेट के बावजूद टीम इंडिया की जर्सी का इंतजार… वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर उठे बड़े सवाल!
NTN REPORT// नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है, वह हैं 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी। आईपीएल में अपने तूफानी प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरने वाले वैभव ने 776 रन, 72 छक्के और 230 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट जैसे आंकड़ों से क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया है। इसके बावजूद टीम इंडिया की जर्सी पहनने का उनका इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू कब मिलेगा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि जब टीम मैनेजमेंट खुद मान रहा है कि यह खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार है, तो फिर उसे मैदान पर उतारने में देरी क्यों हो रही है?
आयरलैंड के खिलाफ हार के बाद बढ़ी बहस
आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारत को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। दूसरे मुकाबले में भारत सिर्फ एक रन से पिछड़ गया। इस हार के बाद वैभव को मौका नहीं मिलने का मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया।
भारतीय टीम के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने साफ कहा कि वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उन्हें भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी जिससे बाकी खिलाड़ी गुजरे हैं।
यहीं से सवाल खड़ा होता है कि अगर खिलाड़ी तैयार है और टीम लगातार प्रयोग कर रही है, तो फिर उसे मौका क्यों नहीं दिया जा रहा?
तैयार भी हैं… लेकिन प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं!
आमतौर पर किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने के पीछे दो कारण होते हैं—या तो खिलाड़ी तैयार नहीं होता या फिर टीम में उसकी जगह नहीं बनती।
लेकिन वैभव के मामले में स्थिति अलग है। टीम मैनेजमेंट उनकी क्षमता पर भरोसा जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ टीम को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में चयन नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या यह सिर्फ प्रक्रिया का हिस्सा है या फिर टीम अपने पुराने फैसलों को बदलने से बच रही है?
पुराने प्रदर्शन पर भरोसा या नए टैलेंट को मौका?
कोच रयान टेन डोशेट ने संजू सैमसन का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ महीने पहले भारत को टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी और टीम खिलाड़ियों को पर्याप्त समय देना चाहती है।
यह तर्क अपनी जगह सही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर सीरीज नई चुनौती लेकर आती है। अगर किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन गिर रहा हो और बेंच पर एक ऐसा युवा बल्लेबाज बैठा हो जिसने आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खुद को साबित किया है, तो चयन को लेकर चर्चा होना तय है।
हार के बाद भी बदलाव नहीं, तो सोच पर उठते हैं सवाल
आयरलैंड के खिलाफ सीरीज हारने के बाद भी भारतीय टीम ने वैभव को मौका नहीं दिया। इसका संकेत यही माना जा रहा है कि टीम मैनेजमेंट अभी भी स्थापित खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि जब टीम नए खिलाड़ियों को मौका देने की बात करती है, तो फिर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले युवा खिलाड़ी को लगातार बाहर रखना समझ से परे है।
क्या ‘प्रोसेस’ प्रतिभा से बड़ी हो गई है?
हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए, यह क्रिकेट का पुराना सिद्धांत है। लेकिन कई बार असाधारण प्रतिभाएं सामान्य नियमों से अलग पहचान बनाती हैं।
अगर कोई 15 साल का बल्लेबाज दुनिया के बड़े गेंदबाजों के खिलाफ आईपीएल जैसे मंच पर शानदार प्रदर्शन कर सकता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उसे और कितना साबित करना होगा?
भारतीय क्रिकेट इतिहास में भी कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई।
गावस्कर की राय ने बढ़ाई चर्चा
पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ ही मौका मिलना चाहिए था और अब इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना चाहिए।
गावस्कर का कहना है कि वैभव को ओपनिंग या नंबर-3 पर मौका दिया जा सकता है। अगर इंग्लैंड के खिलाफ टीम को शुरुआती बढ़त बनानी है तो वैभव जैसे आक्रामक बल्लेबाज को आजमाना चाहिए।
डेब्यू कैप बंटी, लेकिन वैभव की बारी फिर टली
आयरलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में कप्तान ने टीम में दो बदलाव किए। युवा ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे और तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। लेकिन जिस खिलाड़ी के डेब्यू का सबसे ज्यादा इंतजार था, वह एक बार फिर डगआउट में बैठा रहा।
सवाल यह नहीं है कि दूसरे खिलाड़ियों को मौका क्यों मिला, बल्कि सवाल यह है कि जब टीम दो नए खिलाड़ियों पर भरोसा दिखा सकती है, तो वैभव सूर्यवंशी पर वही भरोसा क्यों नहीं दिखाया जा रहा?
अब इंग्लैंड सीरीज पर टिकी नजरें
अब भारतीय टीम की अगली परीक्षा इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में होगी। अगर वहां भी वैभव को मौका नहीं मिलता है, तो ‘प्रोसेस’ वाली दलील पर सवाल और तेज हो सकते हैं।
क्योंकि अब बहस सिर्फ डेब्यू की नहीं है, बल्कि यह है कि क्या भारतीय क्रिकेट में असाधारण प्रतिभा को भी अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा? यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।