
तलाक की दहलीज पर टूटा रिश्ता फिर जुड़ा: कोर्ट में पति की एक मुस्कान ने बदल दी शिखा की जिंदगी
NTN REPORT// नई दिल्ली: छह साल के रिश्ते में शादी, विवाद, मुकदमा और फिर एक ऐसा भावुक मोड़ आया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में तलाक की लड़ाई लड़ रही एक महिला ने अचानक अपने ही हाथों से तलाक के दस्तावेज फाड़ दिए और पति से गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगी। वजह थी पति का वह व्यवहार, जिसने पुराने गिले-शिकवे खत्म कर रिश्ते को एक नई शुरुआत दे दी।

जानकारी के मुताबिक शिखा और सौरभ की शादी साल 2020 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद शुरू हो गए। धीरे-धीरे पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ती गईं और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।
शिखा ने सौरभ के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज कराया और तलाक की मांग की। वह चाहती थी कि रिश्ता खत्म हो जाए और पति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े। यह मामला दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में करीब पांच साल तक चलता रहा।
लंबी कानूनी प्रक्रिया, वकीलों की फीस और लगातार चल रही लड़ाई ने शिखा के परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान कर दिया। बेटी के भविष्य की चिंता और आर्थिक तनाव के बीच शिखा के पिता की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया।
हालात खराब थे, परिवार के पास ज्यादा संसाधन नहीं थे। शिखा ने अपने पिता को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। जब यह बात सौरभ को पता चली तो उसने पुराने विवादों को किनारे रखते हुए मदद का फैसला किया। वह अपने ससुर को बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल लेकर गया। समय पर इलाज मिलने से शिखा के पिता की हालत सुधर गई।
इस घटना ने शिखा के मन में पति के प्रति बदलते भाव पैदा किए, लेकिन दोनों के बीच चल रहा तलाक का मुकदमा उनके मिलन में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था।

अगले दिन कोर्ट में सुनवाई थी। दोनों पक्ष अपने-अपने वकीलों के साथ अदालत पहुंचे। बहस के दौरान जज ने सौरभ से पूछा कि क्या वह तलाक देना चाहता है? जवाब देने से पहले सौरभ ने शिखा की तरफ देखा और हल्की सी मुस्कान दी।
यही पल शिखा के लिए भावनाओं का मोड़ बन गया। उसने अचानक तलाक के कागज फाड़ दिए और दौड़कर सौरभ के पास पहुंच गई। इसके बाद दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे।
अदालत में मौजूद लोग इस भावुक दृश्य को देखकर कुछ देर के लिए खामोश हो गए। शिखा को अपने फैसलों और पति के व्यवहार को लेकर पछतावा हुआ। जिस रिश्ते को खत्म करने के लिए दोनों कोर्ट पहुंचे थे, उसी रिश्ते को बचाने का फैसला वहीं अदालत में हो गया।
यह घटना इस बात की मिसाल बन गई कि कभी-कभी रिश्तों में आई कड़वाहट को खत्म करने के लिए एक छोटा सा अच्छा कदम भी बड़ी दूरी मिटा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।