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भारतराज्य/शहर

NEET पुनर्परीक्षा पर संसदीय समिति की बैठक: दिग्विजय सिंह बोले- छात्रों के साथ नहीं होगा अन्याय, परीक्षा सुरक्षा पर विशेष जोर

21 जून की पुनर्परीक्षा को लेकर तैयारियों की समीक्षा, छात्रों का भरोसा बहाल करने पर हुआ मंथन

NTN REPORT// नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर जारी विवाद के बीच सोमवार को शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में 21 जून को प्रस्तावित नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियों, परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था तथा छात्रों के बीच विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की संस्थाओं पर पूरा भरोसा है तथा उन्हें विश्वास है कि छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा।

फाइल फोटो

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला राजनीति का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इस पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना आवश्यक है।

परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने पर जोर

बैठक में सबसे अधिक ध्यान 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहा। समिति के सदस्यों ने शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से पूछा कि प्रश्नपत्र को लीक-प्रूफ बनाने तथा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए क्या विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने समिति को बताया कि इस बार प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन-हाउस पेपर सेटर्स, शिक्षकों तथा प्रोफेसरों की सेवाएं ली जा रही हैं। साथ ही प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।

छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए विशेष पहल का सुझाव

समिति के कई सदस्यों ने माना कि पुनर्परीक्षा से पहले छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अथवा शिक्षा मंत्री की ओर से छात्रों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें यह विश्वास मिल सके कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई, ताकि परीक्षा संचालन के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए।

अगले वर्ष की परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी दिए गए सुझाव

समिति ने केवल वर्तमान परीक्षा तक ही चर्चा सीमित नहीं रखी, बल्कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने पर भी विचार किया। सदस्यों ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष की परीक्षा की तैयारियां अभी से शुरू की जाएं।

इसके अलावा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली को और सशक्त बनाने, परीक्षा प्रबंधन से जुड़े तकनीकी स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने जैसे सुझाव भी सामने आए।

बैठक से पहले राजनीतिकरण को लेकर भी उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार बैठक शुरू होने से पहले समिति के सदस्यों के बीच अनौपचारिक चर्चा हुई। इस दौरान सत्तापक्ष के कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि जब मामले की जांच चल रही है तो इस तरह की बैठकों की आवश्यकता क्या है और क्या इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है।

इस पर दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि यह विषय राजनीति से ऊपर है और इसका संबंध सीधे छात्रों तथा उनके परिवारों की चिंताओं से है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

संसदीय समिति में पार्टी लाइन से ऊपर उठकर होती है चर्चा: दिग्विजय सिंह

बैठक समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत में दिग्विजय Singh ने कहा कि संसदीय स्थायी समिति में किसी भी विषय पर पार्टी लाइन के आधार पर चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर विचार करने वाले सदस्यों के रूप में अपनी राय रखते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के भीतर हुई विस्तृत चर्चा पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना, प्रधानमंत्री पर जताया भरोसा

जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि NEET मामले में प्रधानमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा, तो उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा है तो यह शिक्षा मंत्री की अक्षमता को दर्शाता है और ऐसी स्थिति में उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए था।

हालांकि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा को लेकर उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने स्वयं इसकी जिम्मेदारी ली है तो उन्हें विश्वास है कि परीक्षा निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि इसके बाद भी पेपर लीक जैसी घटना सामने आती है तो स्थिति बेहद गंभीर मानी जाएगी।

बैठक में ये नेता रहे मौजूद

बैठक में भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविशंकर प्रसाद, घनश्याम तिवाड़ी, बांसुरी स्वराज और संबित पात्रा शामिल हुए। वहीं विपक्ष की ओर से डीएमके की टी. सुमति, समाजवादी पार्टी के राजीव राय और कांग्रेस के डीन कुरियाकोस ने भाग लिया।

NEET विवाद के बाद आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और छात्रों का विश्वास बहाल करने पर विशेष जोर दिया गया। 21 जून की पुनर्परीक्षा को लेकर सरकार और संसदीय समिति दोनों ही किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए सतर्क दिखाई दे रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुनर्परीक्षा कितनी निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न होती है।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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