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धर्म

सुबह उठते ही आईना देखना पड़ सकता है भारी

ब्रह्म मुहूर्त में ‘करदर्शनम्’ से शुरू करें दिन, वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में बताया गया खास महत्व

NTN NEWS REPORT// सुबह उठते ही आईना देखना आम आदत है, लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह आदत आपके पूरे दिन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। शास्त्रों में सुबह का समय, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त, अत्यंत पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना गया है। ऐसे में दिन की शुरुआत सही तरीके से करना बेहद जरूरी बताया गया है।

फाइल फोटो

क्यों नहीं देखना चाहिए सुबह-सुबह आईना?

वास्तु के अनुसार, नींद से उठते समय शरीर में आलस्य और नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है। इस समय चेहरा भी थका और सूजा हुआ दिखाई देता है। मान्यता है कि जैसे ही व्यक्ति आईना देखता है, यह नकारात्मकता उसकी आंखों के माध्यम से दोबारा शरीर में प्रवेश कर जाती है, जिससे पूरे दिन भारीपन और चिड़चिड़ापन बना रह सकता है।

‘करदर्शनम्’ से दिन की शुभ शुरुआत

धार्मिक ग्रंथों में सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करने की परंपरा बताई गई है, जिसे ‘करदर्शनम्’ कहा जाता है। इस दौरान एक विशेष मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है—

“कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥”
इसका अर्थ है कि हाथों के अग्र भाग में मां लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में ब्रह्मा का वास होता है। इस मंत्र के साथ दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और शुभता प्रदान करती है।

बेड के सामने आईना होना क्यों माना जाता है दोष?

यदि बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल या आईना हो, तो वास्तु के अनुसार यह दोष माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से कहा जाता है कि नींद के दौरान आत्मा का सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है। इससे मानसिक तनाव और अशांति बढ़ने की आशंका रहती है।

क्या करें? अपनाएं ये आसान उपाय

  • आईने को ढकें: यदि बेडरूम में आईना है, तो रात में सोते समय उस पर पर्दा या कपड़ा डाल दें।
  • मंगल दर्शन करें: सुबह उठते ही भगवान, उगते सूरज या पक्षियों की तस्वीर देखें।
  • हथेलियों को देखें: बिस्तर छोड़ने से पहले हथेलियों के दर्शन कर उन्हें चेहरे पर फेरें।
  • आईना बाद में देखें: चेहरा धोने या स्नान के बाद ही आईना देखना बेहतर माना गया है।

सुबह की सही दिनचर्या क्या हो?

विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की शुरुआत शांत मन और सकारात्मक सोच के साथ करनी चाहिए। उठते ही ईश्वर का स्मरण, ध्यान या प्राणायाम करना मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। इसकी वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक नहीं है। अमल करने से पहले अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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