
बीमा दावा खारिज करना कंपनी को पड़ा महंगा: उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश, 85 हजार रुपये से अधिक राशि चुकाने के निर्देश
NTN NEWS REPORT//जांजगीर-चांपा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को उपभोक्ता का वैध दावा निपटाने का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 75,000 रुपये की बीमा राशि, 3,000 रुपये मुकदमे का खर्च तथा 7,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने के निर्देश दिए हैं। आदेशानुसार यह राशि 45 दिनों के भीतर भुगतान करनी होगी, अन्यथा 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
क्या है पूरा मामला
परिवादी इस्तेखार अहमद पिता ईजहार, निवासी खड़पड़ीपारा वार्ड क्रमांक 21, जांजगीर, जिला जांजगीर-चांपा ने ज्यूरिख कोटक जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से “कोटक ग्रुप स्मार्ट” बीमा पॉलिसी दिनांक 23 मई 2024 से 22 मई 2025 तक के लिए ली थी।
पॉलिसी के तहत दुर्घटना मृत्यु पर 1,55,000 रुपये तथा हेल्थ बीमा सर्विस के अंतर्गत प्रतिदिन 5,000 रुपये (अधिकतम 30 दिन तक) का प्रावधान था।
बीमा अवधि के दौरान 25 जनवरी 2025 से 8 फरवरी 2025 तक पेशाब में संक्रमण और तेज बुखार के कारण शिकायतकर्ता को 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराना पड़ा। इलाज में कुल 83,100 रुपये का खर्च आया, जिसमें से 75,000 रुपये का दावा बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
कंपनी ने क्यों किया दावा निरस्त
बीमा कंपनी ने 11 जून 2025 को दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमित व्यक्ति ने नियम एवं शर्तों का पालन नहीं किया और दस्तावेज संदिग्ध एवं अपर्याप्त हैं।
दावा निरस्त होने के बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर-चांपा के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया।
आयोग ने क्या पाया
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी एवं सदस्य महिमा सिंह ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र, दस्तावेज और तर्कों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि:
- बीमाधारक ने कोई गलत जानकारी नहीं दी थी।
- पॉलिसी में प्रतिदिन 5,000 रुपये की हेल्थ सर्विस का प्रावधान था।
- शिकायतकर्ता 15 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा।
- 83,100 रुपये के कुल खर्च में से 75,000 रुपये का दावा नियमों के अनुरूप और उचित था।
आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी द्वारा बिना उचित कारण दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग का आदेश
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के अंतर्गत प्रस्तुत शिकायत को स्वीकार करते हुए आयोग ने आदेश दिया कि:
- 75,000 रुपये बीमा राशि
- 3,000 रुपये वाद व्यय
- 7,000 रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति
कुल 85,000 रुपये से अधिक की राशि आदेश दिनांक से 45 दिनों के भीतर अदा की जाए।
यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो आदेश दिनांक से भुगतान तक की अवधि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि वैध दावों को मनमाने ढंग से खारिज करना बीमा कंपनियों को भारी पड़ सकता है।