
NTN NEWS REPORT// नवभारत ब्यूरो, रायपुर।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को शराब घोटाला मामले में राहत नहीं मिली है। सोमवार को विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अब चैतन्य बघेल को न्यायिक रिमांड में ही रहना होगा।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाला मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि चैतन्य बघेल को इस घोटाले से लगभग 16.70 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिन्हें उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से निवेश किया।
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य बघेल की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने आदेश जारी करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
इससे पहले, 15 अक्टूबर को एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा उनकी रिमांड अवधि पूरी होने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेशी कराई गई थी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से मिली राशि का उपयोग ठेकेदारों को नकद भुगतान करने और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के माध्यम से लेनदेन में किया। ईडी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने दिलोज सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर एक योजना तैयार की थी, जिसके तहत कर्मचारियों के नाम पर “विघटलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैट खरीदे गए और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
फिलहाल, चैतन्य बघेल न्यायिक हिरासत में हैं और आगामी 29 अक्टूबर तक जेल में रहेंगे।