
मैं ब्राह्मण हूं और ईश्वर ने मुझ पर सबसे बड़ा उपकार किया… नितिन गडकरी का बयान आखिर क्यों वायरल
Nitin Gadkari News: नितिन गडकरी ने नागपुर में कहा कि ब्राह्मणों को आरक्षण न मिलना परमेश्वर का उपकार है, जिससे आरक्षण, जातिवाद और सामाजिक समानता पर नई बहस छिड़ गई है.
NTN NEWS REPORT: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा बयान दिया है. उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. गडकरी खुद ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि परमेश्वर ने उन पर सबसे बड़ा उपकार यह किया कि ब्राह्मणों को आरक्षण नहीं मिला।

इस बयान ने आरक्षण व्यवस्था, जातिवाद और सामाजिक समानता पर नई बहस छेड़ दी है. जहां एक तरफ कुछ लोग इसे साहसी बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक इसे विशेषाधिकार की निशानी मान रहे हैं. कार्यक्रम में गडकरी ने कहा- मैं हमेशा मजाक में कहता हूं कि अगर परमेश्वर ने मुझ पर, जो मैं ब्राह्मण जाति का हूं, सबसे बड़ा कोई उपकार किया होगा तो वह यही कि हमें आरक्षण नहीं दिया।
उन्होंने आगे विभिन्न राज्यों में ब्राह्मण समुदाय की स्थिति पर टिप्पणी की. महाराष्ट्र में ब्राह्मणों का महत्व कम होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ब्राह्मणों का दबदबा है, जहां दुबे, मिश्रा, त्रिपाठी जैसे उपनाम वाले लोग शक्तिशाली हैं. गडकरी ने उदाहरण दिया कि जैसे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय का महत्व है, वैसे ही वहां ब्राह्मण प्रभावशाली हैं. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वे जात-पात नहीं मानते और कोई भी इंसान जाति, धर्म या भाषा से नहीं, बल्कि गुणों से बड़ा होता है।
जाति आधारित राजनीति की निंदा : गडकरी का यह बयान ब्राह्मण समुदाय की स्थिति को उजागर करता है, जो ऐतिहासिक रूप से सामान्य श्रेणी में आता है. गडकरी हमेशा से जातिवाद के खिलाफ खड़े होते रहे हैं. मार्च 2025 में नागपुर में ही उन्होंने जाति-आधारित राजनीति की निंदा की और कहा कि जो जाति की बात करेगा, उसे ‘कस के मारूंगा लात’. उनका यह बयान भी काफी वायरल हुआ था. इससे पहले 2019 में उन्होंने कहा था कि आरक्षण अकेले किसी समुदाय के विकास की गारंटी नहीं है।
लेकिन, उनका ताजा बयान आरक्षण विरोधी धारणा को मजबूत कर सकता है. आलोचकों का कहना है कि ब्राह्मण समुदाय ऐतिहासिक रूप से शिक्षित और प्रभावशाली रहा है, इसलिए आरक्षण की जरूरत नहीं. वहीं, समर्थकों का तर्क है कि गरीब ब्राह्मणों को भी लाभ मिलना चाहिए जैसा कि कुछ राज्यों में EWS कोटा के तहत हो रहा है।