
अधिकारी नीली बत्ती लगी गाड़ियों का अवैध रूप से कर रहे उपयोग, नहीं किसी कार्यवाही का डर, आखिर इन अधिकारियों पर कौन करेगा कार्यवाही ?
NTN REPORT // नीली बत्ती लगी गाड़ी अथवा फ्लैशर लाइट लगी गाड़ी के दुरुपयोग से जुड़ी खबरें कई जगहों पर सामने आ चुकी हैं. इन खबरों के मुताबिक, सरकारी अधिकारी अपनी निजी गाड़ियों में या सरकारी गाड़ियों में नीली बत्ती लगा रहे हैं। इसके चलते, परिवहन विभाग ने कार्रवाई करने के कई बार दिशा निर्देश जारी किए है। परंतु अधिकारियों का नीली बत्ती से मोह नहीं छूट पा रहा है। आज हम बात कर रहे है जांजगीर चांपा जिले के नीली बत्ती के शौकीन अधिकारियों की ऐसे कई अधिकारी है जो बेधड़क बिना किसी डर से अवैध रूप से निजी एवं सरकारी गाड़ियों में नीली बत्ती एवं फ्लैशर लाल नीली बत्ती गाड़ियों का प्रयोग कर रहे है। इन अधिकारियों पर जो की बड़े बड़े पदों पर आसीन होते है इनके ऊपर नियम कायदे को पालन करवाने की जिम्मेदारी होती है और ये है कि खुद ही नियम कायदे की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से नीली बत्ती लगी गाड़ी का उपयोग कर रहे है।

छत्तीसगढ़ में नीली बत्ती एवं फ्लैशर लाइट के लगाने के नियम: छत्तीसगढ़ शासन परिवहन विभाग मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर , दिनांक 20/04/2017 के आदेश
क्रमांक एफ 5-13/आठ-परि/2001 केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 108 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार एतद् द्वारा पूर्व में छत्तीसगढ़ शासन, परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ 5-13/आठ-परि/2001 दिनांक 18 जून 2014 जो छत्तीसगढ़ के राजपत्र (असाधारण) में दिनांक 19 जून 2014 को प्रकाशित हुआ है, में निम्नानुसार संशोधन करती है, अर्थात्- “अधिसूचना के कंडिका (क) यान के शीर्ष अग्रभाग पर फ्लैशर सहित लाल बत्ती एवं कंडिका (७) यान के शीर्ष अग्रभाग पर फ्लैशर रहित लाल बत्ती तथा कंडिका (ग) यान के शीर्ष अग्रभाग पर नीली बत्ती के क्रमांक (1) से (19) को तत्काल प्रभाव से विलोपित किया जाता है।”
यह स्पष्ट किया जाता है कि आदेश दिनांक से संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में किसी भी वाहन/पदाधिकारी को यान के शीर्ष अग्र भाग पर फ्लैशर सहित अथवा फ्लैशर रहित लाल बत्ती के उपयोग की अनुज्ञा नहीं है तथा अधिसूचना के कंडिका (ग) के क्रमांक (20), (21) एवं (22) पर उल्लेखित एंबुलेंस, अग्निशमन यान एवं सुरक्षा/मार्गदर्शन/कानून व्यवस्था में संलग्न पुलिस के मैदानी अमले के वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन पदाधिकारी को यान के शीर्ष अग्रभाग पर नीली बत्ती के उपयोग की अनुज्ञा नहीं है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार पत्र जारी कर स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि नीली लाल पीली एवं फ्लैशर लाइट उपयोग किसे है किसे नहीं है।
छत्तीसगढ़ में निजी गाड़ियों (कारों) में अफसरों को अब नीली बत्ती लगाना पड़ सकता भारी : अवैध रूप से गाड़ियों में नीली बत्ती लगाने पर अब कार्रवाई होगी। किसी भी स्तर के अधिकारी हो सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उप परिवहन आयुक्त (RTO) मनोज कुमार ध्रुव के जारी पत्र दिनांक 6/3/2025 के अनुसार प्रदेश के सभी आरटीओ अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए है।
बता दें कि केवल जांजगीर चाम्पा जिले ही नहीं प्रदेश के कई जिलों के सरकारी अधिकारियों द्वारा नीली बत्ती के दुरुपयोग किए जाने की शिकायत लगातार मिलते रहती थी। शिकायत के बाद परिवहन आयुक्त (RTO) ने मामले में संज्ञान लिया है। प्रदेश के अलग-अलग महकमों के अफसरों द्वारा निजी वाहनों पर नीली बत्ती के उपयोग करने की शिकायत मिली है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने उक्त निर्देश जारी किए है। अब कोई भी अफसर अपनी निजी गाड़ियों में नीली बत्ती नहीं लगा सकेंगे। ऐसा करते पाए जाने पर अब कार्रवाई होगी।

एक मई 2017 को भारत में लाल और नीली बत्ती का कल्चर कर दिया गया है खत्म : नियमों के अनुसार, सिर्फ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी सेवाओं में तैनात गाड़ियों पर ही लाल बत्ती लगाई जा सकती है. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इनकी इमरजेंसी सेवा के रूप में पहचान बनी रहे, और जब ये गुजरें तो लोग इन्हें दूर से पहचानकर रास्ता दें. इसके लिए केंद्र सरकार ने बकायदा मोटर वाहन एक्ट 1989 में बदलाव किया था. कानून के नियम 108(1) (3) में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें तय करेंगी कि कौन से वाहनों पर लाल और नीली बत्ती लगाई जा सकेगी. तब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि लाल बत्ती पूरी तरह बैन रहेगी, मगर नीली बत्ती इमरजेन्सी वाहनों पर लगेगी।
एक पेच की वजह से करते इस्तेमाल : कानून के मुताबिक, देश का कोई भी IAS अधिकारी अपनी सरकारी गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती का इस्तेमाल नहीं कर सकता. लेकिन एक क्लॉज ऐसा है, जिसका ये फायदा उठा लेते हैं. सरकार ने पुलिस और प्रशासन के कुछ वाहनों पर बत्ती लगाने की छूट दी थी. इनमें थाने में मौजूद पीआरवी (पुलिस रेस्पॉन्स वीकल्स) और जिप्सी, टाटा सूमो आदि शामिल हैं. लेकिन इसी क्लॉज का फायदा उठाकर तमाम अधिकारी लाल नीली बत्ती या फ्लैशर लाइट लगाते हैं. क्योंकि उन्होंने खुद से इसे इमरजेंसी सेवा के तहत मान लिया है। लेकिन वे भी अपनी प्राइवेट गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती नहीं लगा सकते है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिनांक 20/04/2017 के जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि केवल एम्बुलेंस,अग्निशमन यान एवं सुरक्षा/ मार्गदर्शन/कानून व्यवस्था में संलग्न पुलिस के मैदानी अमले के वाहनों को लाल नीली लगी लाइट लगाने की पात्रता है।

जांजगीर चाम्पा जिले में अधिकारियों में नीली बत्ती लगी गाड़ियों में चलने की मची है होड़ : सरकारी गाड़ियों में लाल नीली बत्ती फ्लैशर लाइट के बैन होने के बावजूद साथ ही लगातार इस पर पत्र आदेश जारी कर कड़ी कार्यवाही करने के आदेश के बावजूद जांजगीर चाम्पा जिले के हठधर्मी अधिकारी नीली बत्ती गाड़ी में चलना नहीं छोड़ पा रहे है क्यों ना उन पर कड़ी कार्यवाही होने का खतरा ही हो फिर भी मोह ऐसा है कि जो छूटने का नाम ही नहीं ले रहा है। बगैर नीली बत्ती एवं फ्लैशर लाइट लगी गाड़ियों में चलने में शायद अपनी तौहीन समझते हो और अवैध रूप से धड़ल्ले से खुद तो उपयोग कर रहे है और अपनों को भी सैर करा रहे है। वही ऐसे कुछ अपवाद स्वरूप गिनती के अधिकारी नियमों का पालन भी कर रहे है पर उनकी गिनती बहुत ही कम है।
क्या अवैध रूप नीली बत्ती लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे अधिकारियों के ऊपर होगी कड़ी कार्यवाही : जांजगीर चाम्पा जिले में अवैध रूप से नीली बत्ती लगी एवं फ्लैशर लाइट लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे अधिकारियों पर कार्यवाही होगी कौन करेगा कार्यवाही यह यक्ष प्रश्न है पुलिस विभाग और परिवहन विभाग इस पर क्या कार्यवाही करेंगे या केवल बड़े बड़े पदों पर आसीन होने के वजह से इन अवैध और कानून की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों को छूट जारी रहेगी ? क्या नियम कायदे केवल आम जन मानस के लिए ही रहेंगे ? या इस बार कड़ी कार्यवाही करते हुए अवैध रूप से नीली बत्ती एवं फ्लैशर लाइट लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे अधिकारियों के गाड़ियों से नीली बत्ती हटाते हुए कड़ी कार्यवाही की जाएगी ?
“अवैध रूप से नीली बत्ती लगी गाड़ियों का उपयोग कर रहे अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने का उप परिवहन आयुक्त का आदेश प्राप्त हुआ है जल्द ही ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी ”
गौरव साहू , जिला परिवहन अधिकारी