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13 साल की IAS सेवा के बाद दिव्या मित्तल का इस्तीफा, यूपी की सियासत में हलचल; अखिलेश के आरोपों से लेकर राजनीतिक पारी की अटकलों तक!

NTN REPORT// लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी और देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से स्वैच्छिक इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने इस्तीफा देने की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है।

प्रतीकात्मक एआई तस्वीर

दूसरी ओर, एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सरकार को अभी तक दिव्या मित्तल का औपचारिक इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। अधिकारी के मुताबिक, पत्र मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस्तीफे के बाद यूपी की सियासत गरमाई

दिव्या मित्तल के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अन्य अनैतिक या अवैध गतिविधियों के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने स्थानांतरण-पदस्थापन, निविदा प्रक्रिया और चंदा वसूली जैसे मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस तरह के दबावों के चलते अधिकारियों को इस्तीफा देने तक की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, दिव्या मित्तल ने अपनी इस्तीफे वाली पोस्ट में किसी राजनीतिक दल, सरकार या किसी व्यक्ति पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया है।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफे का दावा, पुष्टि नहीं

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर उनकी संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने दावा किया कि दिव्या मित्तल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफा दिया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्तीफे के पीछे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने की मंशा हो सकती है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दिव्या मित्तल की ओर से भी अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे को किसी राजनीतिक दल या आगामी चुनाव से जोड़ा हो।

इस्तीफे के ऐलान में क्या लिखा दिव्या मित्तल ने?

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के अनुभव को याद करते हुए लिखा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस यात्रा को विराम दिया है। उन्होंने अपने साधारण पारिवारिक परिवेश से निकलकर बड़े सपने देखने, IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई करने तथा लंदन में नौकरी करने का उल्लेख किया।

उन्होंने लिखा कि जीवन में बहुत कुछ हासिल करने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर रहना अधूरापन महसूस कराता था। उनके मुताबिक, उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत इसी मिट्टी की देन थी और वह इस देश का कर्ज चुकाना चाहती थीं।

दिव्या ने लिखा कि वह उस भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहती थीं, जिसका उन्होंने सपना देखा था। इसी सोच के साथ वह वापस लौटीं और उन्हें आईएएस अधिकारी बनने का अवसर मिला।

‘देवरिया ने सिखाया, सही के साथ खड़ा होना कर्तव्य है’

अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान मिले अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने देवरिया और मिर्जापुर में अपने कार्यकाल को विशेष रूप से याद किया।

उन्होंने लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। वहीं, मिर्जापुर ने उन्हें यह सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि केवल एक राय है।

उन्होंने मां विंध्यवासिनी का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्होंने वहां यह सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और ईश्वर की कृपा से आती है।

दिव्या ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने पूरे हो चुके थे और अब अपने लोगों के लिए देखे गए सपनों को जीना था।

जमीन का हक, दिव्यांगों का सम्मान और किसानों तक पानी पहुंचाने का किया जिक्र

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में प्रशासनिक सेवा के दौरान आम लोगों से जुड़े कामों को अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बताया।

उन्होंने लिखा कि उन्हें वास्तविक संतुष्टि उन लोगों की आंखों में दिखाई दी, जिनके परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा।

उन्होंने कहा कि लोगों के संघर्ष में साथ चलते हुए उन्होंने यह सीखा कि प्रत्येक सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय का वास्तविक अर्थ है।

‘मूर्ख थी, जो सोचा था कुछ देने आई हूं’

अपनी भावुक पोस्ट में दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्हें लगता था कि वह समाज और देश को कुछ देने आई हैं, लेकिन वास्तविकता यह रही कि उन्होंने स्वयं सबसे ज्यादा पाया।

उन्होंने लोगों से मिले प्यार, सम्मान और विश्वास का जिक्र करते हुए कहा कि यही विश्वास उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की हिम्मत देता रहा।

उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का भी आभार जताया और कहा कि उनके साथियों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

लहुरियादह की वृद्ध महिला का भावुक प्रसंग किया साझा

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में मिर्जापुर के लहुरियादह गांव से जुड़ी एक घटना को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब गांव में पहली बार पानी पहुंचा तो वहां की एक वृद्ध महिला ने कुछ कहने के बजाय कांपते हाथों से उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

दिव्या ने लिखा कि पद भले ही आज छूट गया हो, लेकिन उस महिला का स्पर्श जीवनभर उनके साथ रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की मिट्टी ने उन्हें जो सपना दिया है, वह सपना भी उनके साथ बना रहेगा।

दिव्या मित्तल की पोस्ट ने बढ़ाई राजनीतिक अटकलें

दिव्या मित्तल की इस्तीफे वाली पोस्ट में राजनीति का कोई सीधा उल्लेख नहीं है। उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने की घोषणा भी नहीं की है।

फिर भी ‘जिस भारत का सपना देखा था’, ‘इस मिट्टी का कर्ज’ और ‘अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना’ जैसे उनके शब्दों को लेकर उनकी आगे की भूमिका पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद अचानक इस्तीफे का ऐलान और जनसरोकारों से जुड़े उनके विचारों ने इन राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है। हालांकि, फिलहाल उनकी अगली भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

कौन हैं दिव्या मित्तल?

मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बैंगलोर से एमबीए किया है। एमबीए के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की। इसके बाद उन्होंने देश लौटकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया।

वर्ष 2012 में अपने पहले प्रयास में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ था। इसके बाद वर्ष 2013 में दूसरे प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और 68वीं रैंक हासिल कर आईएएस में प्रवेश किया।

 

संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

आईएएस अधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। वह संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर उनकी तैनाती हुई।

मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए वह लहियुरियादह जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों को लेकर चर्चा में आई थीं। आजादी के 75 वर्ष बाद इस दूरदराज गांव में नल से पानी पहुंचने की घटना को उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना गया।

देवरिया में भी उनके कार्यकाल को जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कड़े प्रशासनिक फैसलों के लिए याद किया जाता है।

क्या अब राजनीति में आएंगी दिव्या मित्तल?

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह के दावे और कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, अभी तक दिव्या मित्तल ने स्वयं अपनी राजनीतिक भविष्य की कोई घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल उनकी संभावित राजनीतिक पारी को लेकर सामने आ रही चर्चाओं को केवल अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से सरकार को प्राप्त होने और उस पर नियमानुसार कार्रवाई होने के बाद ही उनकी सेवा स्थिति स्पष्ट होगी।

समाचार स्रोत: इसमें राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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